Bangladesh India Corridor: भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने के मुद्दे पर बांग्लादेश में बवाल, नाहिद इस्लाम ने दी आंदोलन की चेतावनी

Bangladesh India Relations: भारत और बांग्लादेश के बीच एक बार फिर ट्रांजिट कॉरिडोर और गंगा जल बंटवारे का मुद्दा चर्चा में आ गया है। बांग्लादेश की विपक्षी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम ने अपनी सरकार को चेतावनी दी है कि देश की जमीन से भारत को किसी भी तरह का ट्रांजिट कॉरिडोर देने की कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भारत के साथ होने वाली गंगा जल संधि में बांग्लादेश का उचित हिस्सा सुरक्षित रखने की मांग की है।

नाहिद इस्लाम ने कहा कि अगर गंगा जल समझौते में बांग्लादेश के हितों की अनदेखी की गई तो देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में भारत के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और जल बंटवारे को लेकर बहस तेज हो गई है।

India Transit Corridor: भारत को कॉरिडोर देने का क्यों हो रहा विरोध?

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार को नेशनल सिटिजन पार्टी की ओर से एक रैली आयोजित की गई थी। इस रैली में सैकड़ों समर्थकों ने हिस्सा लिया। रैली का मुख्य उद्देश्य गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और बिजली, ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के इस्तीफे की मांग करना था।

इसी दौरान NCP के नेता नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर आरोप लगाया कि वह भारत को बांग्लादेश की जमीन से ट्रांजिट कॉरिडोर उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है।

नाहिद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश की जनता किसी भी ऐसे कॉरिडोर को स्वीकार नहीं करेगी, जिसे देश के हितों के खिलाफ माना जा रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर जनता की भावनाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

हालांकि, यह नाहिद इस्लाम और उनकी पार्टी की राजनीतिक आपत्ति है। बांग्लादेश सरकार ने भारत को कॉरिडोर सौंपने के आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

Japan के दौरे से कैसे जुड़ा भारत- Bangladesh कॉरिडोर का मामला?

इस पूरे विवाद की एक कड़ी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की जापान यात्रा से जुड़ी है। तारिक रहमान 26 से 29 अक्टूबर 2026 तक जापान के दौरे पर थे। इस दौरान बांग्लादेश और जापान ने आपसी आर्थिक सहयोग और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत करने पर सहमति जताई।

दोनों देशों ने बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट (BIG-B) पहल को नए रणनीतिक सहयोग ढांचे के रूप में आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनाई।

इस योजना में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विषय शामिल हैं।

नाहिद इस्लाम का आरोप है कि जापान की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के माध्यम से बांग्लादेश के रास्ते भारत को कॉरिडोर देने की कोशिश की जा रही है।

Matarbari Port: जापान क्यों कर रहा है Bangladesh की मदद?

बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में मातारबाड़ी गहरे समुद्र का बंदरगाह विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी JICA आर्थिक सहायता दे रही है।

इस बंदरगाह को विकसित करने का उद्देश्य समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

जापान की व्यापक क्षेत्रीय योजना में मातारबाड़ी बंदरगाह के जरिए भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की संभावनाएं भी शामिल रही हैं।

हालांकि, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री की जापान यात्रा के दौरान किसी तीसरे देश से संबंधित मुद्दे पर बातचीत नहीं हुई। उनके मुताबिक, यात्रा का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना था।

भारत ने भी पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दिया बयान

इस विवाद के बीच भारत ने भी जापान के साथ अपनी क्षेत्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने की बात कही है।

28 अक्टूबर 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और जापान के बीच कई ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनमें पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि भारत जापान के साथ इन संपर्क परियोजनाओं को और मजबूत करना चाहता है।

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बांग्लादेश के रास्ते व्यापार और परिवहन संपर्क बढ़ाने की संभावनाएं लंबे समय से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की चर्चाओं का हिस्सा रही हैं।

Ganga Water Treaty: 12 दिसंबर को खत्म हो रही 30 साल पुरानी संधि

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे का मुद्दा भी एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों देशों के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए गंगा जल समझौता हुआ था। यह संधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है।

इस समझौते के तहत पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जनवरी से मई के बीच कम पानी के मौसम में गंगा नदी के जल का बंटवारा निर्धारित किया गया है।

बांग्लादेश चाहता है कि नई संधि पहले से अधिक लंबी अवधि के लिए हो और उसमें ऐसी गारंटी शामिल की जाए, जिससे सूखे के मौसम में उसके हिस्से का पानी सुरक्षित रह सके।

नाहिद इस्लाम ने कहा है कि बांग्लादेश इस बार अपने जायज हिस्से के पानी से समझौता नहीं करेगा। अगर नए समझौते में देश के हितों की रक्षा नहीं हुई तो लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल समझौते पर क्या है स्थिति?

गंगा जल समझौते को लेकर भारत का कहना है कि साझा नदियों से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संयुक्त नदी आयोग (JRC) के माध्यम से बातचीत की जाती है।

यह आयोग वर्ष 1972 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य भारत और बांग्लादेश के बीच साझा, सीमा पार और अंतरराष्ट्रीय नदियों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करना है।

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, गंगा जल संधि को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है।

ऐसे में दिसंबर में समाप्त होने जा रही संधि के नवीनीकरण को लेकर दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?

ट्रांजिट कॉरिडोर और गंगा जल बंटवारे के मुद्दे ऐसे समय सामने आए हैं, जब भारत, बांग्लादेश और जापान के बीच क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत हो रही है।

एक तरफ जापान मातारबाड़ी बंदरगाह जैसी परियोजनाओं में निवेश कर रहा है, वहीं भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करना चाहता है।

दूसरी तरफ बांग्लादेश में विपक्षी दलों की ओर से राष्ट्रीय हितों और जल संसाधनों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब देखना होगा कि गंगा जल संधि के नवीनीकरण और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच आगे क्या सहमति बनती है। फिलहाल नाहिद इस्लाम के बयान ने दोनों देशों के संबंधों से जुड़े इन मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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