Chhattisgarh Global Energy Summit: वैश्विक ऊर्जा समिट में छत्तीसगढ़ का दमदार प्रदर्शन, CM साय ने निवेशकों को दिया ₹5.60 लाख करोड़ के निवेश का प्रस्ताव
Chhattisgarh Global Energy Summit 2026: छत्तीसगढ़ ने वैश्विक ऊर्जा मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य की ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाओं को दुनिया के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करते हुए अगले पांच वर्षों में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना बताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर को इस चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस आयोजन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, मंत्री, नीति निर्माता और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। छत्तीसगढ़ ने इस अवसर का इस्तेमाल राज्य को पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी और आधुनिक ऊर्जा तकनीक के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए किया।
Chhattisgarh में ऊर्जा क्षेत्र में 5.60 लाख करोड़ के निवेश की संभावना
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में छत्तीसगढ़ की ऊर्जा विकास योजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि राज्य में अगले पांच वर्षों के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं हैं।
इसमें नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये और ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये की योजना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, औद्योगिक सुविधाओं और निवेश के अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और नई परियोजनाओं की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
2030 तक 15 हजार मेगावाट होगी ग्रीन एनर्जी क्षमता
छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 15,000 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में राज्य की ग्रीन एनर्जी क्षमता करीब 3,000 मेगावाट बताई गई है।
इसके अलावा बिजली की कुल मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी को मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की योजना है।
इसके लिए सौर ऊर्जा, जल विद्युत, बायोमास और ऊर्जा भंडारण जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
सौर और पंप स्टोरेज परियोजनाओं में 65 हजार करोड़ का निवेश
ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ बिजली को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ में ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में 12,300 मेगावाट क्षमता वाली 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं में करीब 65,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10,000 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है।
राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के साथ 40 मेगावाट और 120 मेगावाट-घंटे क्षमता वाली बैटरी स्टोरेज प्रणाली पहले से संचालित है।
Chhattisgarh का खैरा गांव बना पहला पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित गांव
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।
राजनांदगांव जिले का खैरा गांव प्रदेश का पहला पूर्ण रूप से सौर ऊर्जा से संचालित गांव बन गया है। यहां सभी 141 घरों की छतों पर दो-दो किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं।
इनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 93 घरों में भी सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
कृषि क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ रहा है। राज्य में 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों के जरिए लगभग 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जा रही है।
बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन में भी निवेश की तैयारी
छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए सरकार बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी संभावनाएं तलाश रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में कुल 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इनमें करीब 800 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही निजी निवेशकों से प्राप्त लगभग 6,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर भी प्रक्रिया जारी है।
राज्य में करीब 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना भी प्रस्तुत की गई।
वैश्विक निवेशकों के सामने छत्तीसगढ़ का ऊर्जा मॉडल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के पवेलियन का भी अवलोकन किया। यहां राज्य की ऊर्जा परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, तकनीकी पहलों और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया।
उन्होंने निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत कर राज्य की नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल हैं।
इस आयोजन के जरिए छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने अपनी ऊर्जा क्षमता और औद्योगिक संभावनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिला है।
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