Rahul Gandhi : सुप्रीम कोर्ट का राहुल को नोटिस, मार्च पर सवाल
Rahul Gandhi और 12 अक्टूबर के मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। CJI सूर्यकांत ने अदालत परिसर में भीड़ पहुंचने और मार्च के मकसद पर सवाल उठाए।
Niharika Gupta Verified Public Figure • 11 Oct, 2026Journalist
Oct 15, 2026 • 2:05 PM
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Niharika Gupta
6 hours ago
Rahul Gandhi : सुप्रीम कोर्ट का राहुल को नोटिस, मार्च पर सवाल
Rahul Gandhi और 12 अक्टूबर के मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। CJI सूर्यकांत ने अदालत परिसर में भीड़ पहुंचने और मार्च के मकसद पर सवाल उठाए।
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Rahul Gandhi : सुप्रीम कोर्ट का राहुल गांधी को नोटिस !!
Rahul Gandhi Supreme Court Notice: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 15 अक्टूबर को अहम घटनाक्रम सामने आया। 12 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च और अदालत परिसर में लोगों के पहुंचने के मामले पर शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाया। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मार्च के उद्देश्य और उससे पैदा हुई अव्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
Rahul Gandhi के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी सवाल उठाए गए थे।
15 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अदालत परिसर में भीड़ के पहुंचने और मार्च के उद्देश्य को लेकर चिंता जताई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी से मार्च के इरादे और उससे पैदा हुई अव्यवस्था के बारे में स्पष्टीकरण मांगा।
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अदालत की सख्त टिप्पणियों के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन और न्यायपालिका के कामकाज के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। अदालत से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
12 अक्टूबर को क्यों निकाला गया था मार्च?
राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की थी। विपक्षी नेताओं का उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को उठाना था।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
राहुल गांधी ने इस विरोध को लोकतंत्र और संविधान से जुड़े सवालों के रूप में पेश किया था। विपक्ष की मांगों में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल रही है।
हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े आरोपों और उनके कानूनी निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है। इन आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।
CJI सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शन को लेकर क्या रुख अपनाया?
सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि लोकतांत्रिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं, लेकिन उनसे अदालत के कामकाज में बाधा नहीं आनी चाहिए। 12 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था कि लोकतांत्रिक गतिविधियां सुचारु रूप से चलनी चाहिए और वकीलों, अदालत के कर्मचारियों तथा मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इस रुख से स्पष्ट है कि अदालत शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और न्यायिक संस्थान के सुचारु संचालन के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रही है।
15 अक्टूबर को मार्च से संबंधित मामले में सामने आई सख्त टिप्पणियों ने इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अब आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के निर्देशों पर नजर रहेगी।
SIR और चुनाव आयोग का विवाद भी चर्चा में
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। SIR के तहत मतदाता सूचियों की जांच और संशोधन किया जाता है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। वहीं, इस विवाद से जुड़े आरोपों और दावों पर फैसला तथ्यों, दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और नागरिकों के मतदान संबंधी अधिकार जैसे व्यापक मुद्दे भी हैं। इसलिए यह सुनवाई केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कानूनी पहलुओं पर भी सबकी नजर है।
आगे क्या होगा?
राहुल गांधी और अन्य संबंधित लोगों को जारी नोटिस के बाद मामले में आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। संबंधित पक्षों के जवाब, अदालत की टिप्पणियां और आगामी आदेश यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि 12 अक्टूबर के मार्च से जुड़े विवाद पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, इस मामले में दो मुद्दे प्रमुख हैं। पहला, सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने और अदालत के कामकाज से जुड़े सवाल। दूसरा, SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की ओर से उठाई गई चिंताएं।
आने वाली सुनवाई में अदालत का रुख और संबंधित पक्षों की दलीलें इस पूरे मामले की दिशा स्पष्ट कर सकती हैं।