सिरमौर : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में निजी बस संचालकों ने बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर चिंता जताई है। जिला सिरमौर बस ऑपरेटर यूनियन का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स, बीमा और सरकारी शुल्क में लगातार बढ़ोतरी के कारण बस संचालन मुश्किल होता जा रहा है। यूनियन के अनुसार, यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जिले के 15 से 20 निजी बस रूट बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

'लगातार बढ़ रहा है आर्थिक बोझ'

मीडिया से बातचीत में जिला सिरमौर बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने कहा कि जिले में करीब 160 निजी बस रूट संचालित किए जा रहे हैं और ऑपरेटर वर्षों से लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की ओर से परमिट और रजिस्ट्रेशन फीस में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे निजी बस संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।

डीजल, बीमा और स्पेयर पार्ट्स की बढ़ी लागत

यूनियन अध्यक्ष के अनुसार, केवल सरकारी शुल्क ही नहीं बल्कि वाहनों का बीमा, स्पेयर पार्ट्स और डीजल जैसी आवश्यक लागत भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन बढ़ते खर्चों के मुकाबले बस किराए में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई है, जिससे ऑपरेटरों के लिए बसों का संचालन आर्थिक रूप से कठिन हो गया है।

कई रूट बंद होने की आशंका

बलविंदर सिंह ने दावा किया कि सिरमौर जिले के 15 से 20 बस रूट ऐसे हैं, जहां यात्रियों की संख्या और बढ़ते खर्च के कारण निजी बस संचालकों के लिए सेवा जारी रखना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कोई राहत नहीं मिली तो इन रूटों पर बस सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं।

सरकार से राहत की मांग

बस ऑपरेटर यूनियन ने प्रदेश सरकार से परमिट और रजिस्ट्रेशन शुल्क की समीक्षा करने तथा निजी बस संचालकों को राहत देने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि यदि परिवहन क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।