पटना : बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा। इस संबंध में रविवार को औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। पांच दिनों तक चलने वाला यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले 21 वर्षों में पहली बार विधानसभा की कार्यवाही पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी में संचालित होगी।
पहले दिन नए सदस्यों को दिलाई जाएगी शपथ
अष्टादश बिहार विधानसभा के तृतीय सत्र के प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 20 जुलाई को यदि आवश्यकता हुई तो नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ या प्रतिज्ञान दिलाया जाएगा। इसी दिन अवकाश अवधि के दौरान राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेशों की प्रमाणित प्रतियां सदन के पटल पर रखी जाएंगी।
इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम अनुपूरक व्यय विवरणी भी विधानसभा में पेश की जाएगी।
अनुपूरक बजट और विधेयकों पर होगी चर्चा
21 और 22 जुलाई को सरकार विभिन्न राजकीय विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों को सदन के सामने रखेगी। वहीं 23 जुलाई को प्रथम अनुपूरक व्यय विवरणी पर चर्चा, मतदान और उससे संबंधित विनियोग विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सत्र के अंतिम दिन 24 जुलाई को गैर-सरकारी सदस्यों के कार्य और निजी संकल्पों पर चर्चा प्रस्तावित है।
विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में
मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विवादों और बिलौटी में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
वहीं सत्तापक्ष सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रमुखता से सदन में रखने की तैयारी कर रहा है।
नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी रहेगी चर्चा का विषय
इस बार के मानसून सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा नीतीश कुमार की अनुपस्थिति रहने वाली है। लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के कारण वे विधानसभा की कार्यवाही का प्रमुख चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके बिना सदन की कार्यवाही का अलग राजनीतिक माहौल देखने को मिल सकता है।