India Economy : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी जुलाई 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि देश की मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं और औद्योगिक तथा सेवा क्षेत्रों में सकारात्मक संकेत देखने को मिल रहे हैं।

हालांकि, मंत्रालय ने यह भी आगाह किया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की स्थिति में ऊर्जा कीमतों और राजकोषीय संतुलन पर असर पड़ सकता है।

India Economy: जून में कोर सेक्टर की वृद्धि 5 प्रतिशत रही

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जून 2026 में संशोधित आंकड़ों के आधार पर कोर इंडस्ट्रीज इंडेक्स में सालाना 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में लौह अयस्क, बिजली, सीमेंट और इस्पात क्षेत्रों का प्रमुख योगदान रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों का बेहतर प्रदर्शन औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देता है और इससे समग्र आर्थिक विकास को भी समर्थन मिला है।

विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने पर सरकार का जोर

वित्त मंत्रालय ने जुलाई के दौरान सरकार द्वारा शुरू की गई कई नीतिगत और औद्योगिक पहलों का भी उल्लेख किया है। इनमें सेमिकॉन 2.0, नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में पहल, शिपबिल्डिंग उद्योग को बढ़ावा, स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) से जुड़े नियमों में ढील और भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य देश की विनिर्माण क्षमता बढ़ाना, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को अधिक मजबूत बनाना और रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम करना है।

कुछ आर्थिक संकेतकों में नरमी भी दर्ज

आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतकों, जैसे ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई, में कुछ नरमी देखने को मिली है।

इसके विपरीत, मजबूत घरेलू और वैश्विक मांग के चलते सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है, जिससे अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिल रहा है।

वैश्विक जोखिमों पर सरकार की नजर

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को उच्च आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए घरेलू सुधारों और संतुलित व्यापक आर्थिक प्रबंधन पर लगातार काम करना होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने वाले नीतिगत फैसलों को समयबद्ध तरीके से लागू करना आवश्यक है, ताकि निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहे।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ सकती हैं चुनौतियां

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो इसका असर भारत के राजकोषीय घाटे और चालू खाते के संतुलन पर पड़ सकता है।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत निर्धारित किया है। मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने की स्थिति में इस लक्ष्य पर दबाव बढ़ सकता है।

आईएमएफ ने भी जताई वैश्विक सुस्ती की आशंका

रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की जुलाई 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि 2025 के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2026 में 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आईएमएफ ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चुनौतियों को विश्व अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है।