Public Examinations Amendment Bill 2026 : केंद्र सरकार ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और प्रभावी बनाना तथा पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों पर सख्ती से अंकुश लगाना है।
सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षा प्रणाली में संगठित अनियमितताओं के मामलों को देखते हुए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य से यह संशोधन विधेयक लाया गया है।
Public Examinations Amendment Bill 2026: क्या हैं प्रमुख प्रस्ताव?
प्रस्तावित संशोधन के तहत जांच और न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने दो माह के भीतर जांच पूरी करने, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में दैनिक सुनवाई कराने और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रस्ताव रखा है।
इसके अलावा प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, ताकि मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो।
पेपर लीक और नकल पर सजा होगी और सख्त
विधेयक के अनुसार, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए न्यूनतम सजा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष और अधिकतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष करने का प्रस्ताव है।
इसी तरह अधिकतम जुर्माने की राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
सेवा प्रदाताओं पर भी बढ़ेगी जवाबदेही
सरकार ने परीक्षा आयोजित करने से जुड़े सेवा प्रदाताओं के लिए भी दंडात्मक प्रावधानों को और कठोर बनाने का प्रस्ताव दिया है।
प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे संस्थानों पर अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया जा सकता है। साथ ही, उन्हें सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का भी प्रस्ताव है।
विधेयक में सेवा प्रदाता संस्थानों के प्रबंधकीय अधिकारियों के लिए भी न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल तथा 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है।
संगठित अपराधों पर और कड़ी कार्रवाई
परीक्षाओं से जुड़े संगठित अपराधों के मामलों में भी सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार के अनुसार, ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जा सकती है। वहीं अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
विशेष जांच दल और समयबद्ध अपील का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार देने का भी प्रावधान है कि वह इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच विशेष रूप से गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप सके।
इसके अलावा फास्ट ट्रैक अदालत के फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी। सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि जहां संभव हो, ऐसी अपीलों का निपटारा तीन माह के भीतर किया जाए।