Public Examinations Amendment Bill 2026 : देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर उठी चिंताओं के बीच केंद्र सरकार 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' लोकसभा में पेश करने जा रही है। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' के कुछ प्रावधानों को और प्रभावी बनाने के लिए लाया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस संबंध में प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी दी थी।

Public Examinations Amendment Bill 2026 में क्या हैं प्रमुख प्रस्ताव?

प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, पेपर लीक के दोषियों के लिए कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया जा सकता है। वहीं, यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है तो कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है।

हालांकि, ये सभी प्रावधान विधेयक के प्रस्तावित संशोधनों का हिस्सा हैं। अंतिम स्वरूप संसद की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

लोकसभा में होगी विस्तृत चर्चा

सरकारी कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में यह विधेयक पेश करेंगे। सदन में इस पर कई घंटे चर्चा होने की संभावना है।

संसदीय सूत्रों के मुताबिक, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने चर्चा के दौरान अपने कई सांसदों को भाग लेने की जिम्मेदारी दी है। विभिन्न दलों के सांसद भी विधेयक पर अपनी राय रख सकते हैं।

कौन-कौन ले सकता है चर्चा में हिस्सा?

संसदीय सूत्रों के अनुसार, भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या चर्चा में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न सहयोगी दलों और अन्य पार्टियों के सांसदों के भी अपने विचार रखने की संभावना है।

अंतिम वक्ताओं की सूची सदन की कार्यवाही और अध्यक्ष की अनुमति के अनुसार बदल सकती है।

शिक्षा मंत्रालय में बदलाव के बीच आएगा विधेयक

यह विधेयक ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। नए शिक्षा मंत्री ने पदभार संभालने के बाद मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें शुरू की हैं। माना जा रहा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पेपर लीक पर सख्त कानून की दिशा में कदम

हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने की मांग लगातार उठती रही है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।