राहुल गांधी पर Arjun मेघवाल का हमला, बोले- आलोचना का बहाना हमेशा मिल जाता है; वोटर ID-आधार विवाद पर दिया जवाब
बीकानेर: वोटर आईडी (EPIC) और आधार कार्ड को लेकर देश की राजनीति में विवाद बढ़ता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए वोटर आईडी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के प्रस्ताव पर सवाल उठाए जाने के बाद केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री Arjun राम मेघवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को सरकार के हर सकारात्मक काम में आलोचना का बहाना मिल जाता है।
राजस्थान के बीकानेर में शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए अर्जुन मेघवाल ने कहा कि कांग्रेस का राजनीतिक दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक पहलों और रचनात्मक कार्यों का विरोध करने के आसपास घूमता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी किसी भी पहल के पीछे के उद्देश्य को समझे बिना उसकी आलोचना करने लगते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने तकनीकी विकास का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ तकनीक में बदलाव होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। ऐसे में हर बदलाव का विरोध करना उचित नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर की गई आलोचनाओं का भी उल्लेख किया।
वोटर आईडी और आधार विवाद पर क्या बोले Arjun मेघवाल?
दरअसल, विवाद उस समय बढ़ा जब राहुल गांधी ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी (EPIC) नंबर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के इस्तेमाल से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने इसे षड्यंत्र और अधिकारों की चोरी बताते हुए आशंका जताई थी कि इससे सरकारी यो
जनाओं का लाभ पाने वाले गरीब और जरूरतमंद लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्जुन मेघवाल ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने और राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को सरकार के कामों की आलोचना करने का कोई न कोई बहाना मिल ही जाता है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, तकनीकी विकास लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इसे केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
अशोक गहलोत पर भी साधा निशाना, आकाशवाणी परिसर का उठाया मुद्दा
अर्जुन मेघवाल ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश करने वालों को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
मेघवाल ने दिल्ली स्थित ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) परिसर में हुई एक घटना का उल्लेख करते हुए गहलोत से उनके व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या वहां अराजकता का माहौल नहीं बनाया गया था?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अशोक गहलोत पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जानकारी होनी चाहिए।
उनके अनुसार, चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए किसी भी प्रतिनिधिमंडल को अपने सदस्यों की सूची और ज्ञापन प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद आयोग बैठक का समय और कार्यक्रम निर्धारित करता है।
मेघवाल ने आरोप लगाया कि संबंधित मामले में न तो प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची दी गई और न ही ज्ञापन तैयार किया गया। इसके बजाय बैठक आकाशवाणी परिसर में ही कराने पर जोर दिया गया। उन्होंने इसे अव्यवस्था पैदा करने वाला रवैया बताया।
लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान का किया जिक्र
अर्जुन मेघवाल ने कहा कि विपक्ष की ओर से भाजपा पर अराजकता फैलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन आरोप लगाने वालों को पहले देश के राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि इसी तरह की परिस्थितियों को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया गया है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाकर राजनीतिक माहौल प्रभावित करने का आरोप लगाया।
इंदिरा गांधी के आपातकाल का किया जिक्र
अपने बयान में अर्जुन मेघवाल ने वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लगाए गए आपातकाल का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया था। मेघवाल ने कहा कि उस दौर में देश की संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे और मुख्य न्यायाधीश को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने और विरोध के नाम पर अशांति पैदा करने की राजनीति लोकतंत्र के हित में नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें देश के इतिहास में हुई घटनाओं को भी याद रखना चाहिए।
वोटर आईडी और आधार को लेकर क्या है पूरा मामला?
वोटर आईडी और आधार कार्ड को लेकर मौजूदा विवाद में दो अलग-अलग प्रक्रियाओं को समझना जरूरी है।
पहला मामला चुनावी पहचान पत्र (EPIC) और आधार को जोड़ने से संबंधित है। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जानी है। सरकार ने पहले स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में आधार नंबर देना स्वैच्छिक है।
दूसरा मामला सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान से जुड़ा है। इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के बयान के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के तहत पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित लोगों की पहचान EPIC नंबर तथा आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से की जाएगी।
इसलिए मतदाता सूची में आधार जोड़ने और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए दस्तावेजों के इस्तेमाल को एक ही प्रक्रिया मानना सही नहीं होगा।
अब इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ सरकार लाभार्थियों की सही पहचान और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष संभावित अधिकारों और लाभ से वंचित होने की आशंका उठा रहा है।
फिलहाल बीकानेर में अर्जुन मेघवाल का बयान सामने आने के बाद वोटर आईडी-आधार विवाद को लेकर सियासी चर्चा और तेज हो गई है।
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