अयोध्या : रामलला मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थायी नियुक्ति होने तक अब ट्रस्ट के प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कार्यों का संचालन वही करेंगे।
पद संभालते ही दिया बड़ा संदेश
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में जो भी व्यक्ति जांच में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों रामभक्तों की आस्था से भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था में कुछ कमियां थीं, जिनका कुछ लोगों ने कथित तौर पर फायदा उठाया। अब इन खामियों को दूर कर पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने पर काम किया जाएगा।
ट्रस्ट की छवि बहाल करना होगी बड़ी चुनौती
कृष्ण मोहन ने कहा कि हालिया घटनाक्रम से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है और लोगों के बीच कुछ हद तक अविश्वास की स्थिति बनी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शी कार्यप्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा मजबूत किया जाएगा।
सबसे पहले इन्होंने दर्ज कराई थी शिकायत
चढ़ावा चोरी मामले में सबसे पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराने वाले भी कृष्ण मोहन ही थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। अब तक इस प्रकरण में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच जारी है।
कौन हैं कृष्ण मोहन?
73 वर्षीय कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में है। प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद वह सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे।
वर्तमान में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संघचालक हैं। वर्ष 2025 में उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।
अब क्या होगी उनकी भूमिका?
कार्यवाहक महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन, प्रबंधन और विभिन्न व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। साथ ही कथित चढ़ावा चोरी मामले के बाद व्यवस्थागत सुधार लागू करना और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।