श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी Ram Mandir CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति ने नई दिल्ली में अहम बैठक कर योग्यता और चयन प्रक्रिया से जुड़े मानकों पर चर्चा की है।
CEO पद के लिए 18 जुलाई तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन ई-मेल के जरिए लिए जाने की तैयारी है और इसके लिए अलग ई-मेल आईडी जारी की जाएगी। चयन प्रक्रिया करीब एक महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
Ram Mandir CEO पद के लिए 18 जुलाई तक आवेदन
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के CEO पद के लिए इच्छुक योग्य उम्मीदवार 18 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। चयन समिति आवेदनों की जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करेगी।
इसके बाद चयनित उम्मीदवारों से समिति संवाद करेगी और अंतिम चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक नियुक्त होने वाले CEO का शुरुआती कार्यकाल तीन वर्ष का होगा और उन्हें अयोध्या में रहकर जिम्मेदारी संभालनी होगी।
Ram Mandir CEO के लिए क्या होगी योग्यता?
CEO पद के उम्मीदवार का स्नातक होना अनिवार्य होगा। इसके साथ प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में करीब 20 वर्ष का अनुभव जरूरी रखा गया है।
मंदिर या बड़े धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है। चयन में पेशेवर प्रशासनिक क्षमता, वित्तीय प्रबंधन और संस्थागत संचालन के अनुभव को अहम माना जाएगा।
CEO पद के लिए हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक बताया गया है। चयन समिति के सदस्य सुरेश हावरे ने इससे पहले कहा था कि मंदिर ट्रस्ट के CEO के लिए भगवान राम के प्रति आस्था महत्वपूर्ण मानदंडों में होगी।
अयोध्या में रहकर संभालनी होगी मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी
नए CEO को अयोध्या में रहकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालनी होगी। मंदिर से जुड़े दैनिक प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था और संस्थागत समन्वय में CEO की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है।
देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। ऐसे में ट्रस्ट अब मंदिर प्रबंधन में पेशेवर निगरानी और प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तीन सदस्यीय समिति करेगी Ram Mandir CEO का चयन
CEO की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई है। इसमें पूर्व वैज्ञानिक और मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले सुरेश हावरे, सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी प्रमोद कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल बताए गए हैं।
समिति योग्य उम्मीदवारों के नामों पर विचार करेगी और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। लक्ष्य है कि करीब 30 दिनों के भीतर नए CEO के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद क्यों लिया गया CEO नियुक्ति का फैसला?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी प्रकरण के बाद मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठे थे। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और ट्रस्ट की बैठकों के बीच पेशेवर CEO की नियुक्ति का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों की ओर से भी पेशेवर निगरानी की जरूरत पर जोर दिया गया। इसी क्रम में CEO पद के लिए समिति गठित कर चयन प्रक्रिया शुरू की गई है।
Ram Mandir CEO की नियुक्ति से क्या बदलेगा?
पहले CEO की नियुक्ति को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे वित्तीय निगरानी, विभागों के बीच समन्वय और मंदिर की दैनिक व्यवस्थाओं को अधिक पेशेवर तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सभी की नजर 18 जुलाई तक आने वाले आवेदनों और चयन समिति के अगले फैसले पर है। प्रक्रिया तय समय में पूरी हुई तो अगले कुछ सप्ताह में यह साफ हो सकता है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पहले CEO की जिम्मेदारी किसे मिलेगी।