Rahul Gandhi Letter to President: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने अनुरोध किया है कि मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम के राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने से रोका जाए। राहुल गांधी ने नियुक्ति पर दोबारा विचार करने की मांग भी की है। यह विवाद अंकिता के माता-पिता के विरोध प्रदर्शन और मामले में कथित VIP की भूमिका की जांच को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सामने आया है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मू को क्यों लिखा पत्र?
राहुल गांधी ने अपने पत्र में अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब तक मामले में कथित VIP से जुड़े पहलू की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राष्ट्रपति को लिखे पत्र की जानकारी साझा की। उन्होंने अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने की जरूरत पर जोर दिया और जांच में कथित VIP की पहचान को लेकर उठ रहे सवालों का उल्लेख किया।
कांग्रेस नेता का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच पूरी होने तक नियुक्ति को रोकने पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, यह राहुल गांधी की राजनीतिक और सार्वजनिक मांग है। राष्ट्रपति या सरकार की ओर से इस मांग को स्वीकार किए जाने की पुष्टि अलग से जरूरी होगी।
अंकिता:दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर क्या है विवाद?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद अंकिता भंडारी के माता-पिता ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मांग की कि CBI जांच पूरी होने तक उन्हें पदभार न दिया जाए।
परिवार का कहना है कि अंकिता हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर परिवार ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन किया।
दुष्यंत गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है। इसलिए इस मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। उनकी नियुक्ति पर विवाद होना अपने आप में किसी अपराध में उनकी संलिप्तता साबित नहीं करता।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 19 वर्षीय अंकिता की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बावजूद अंकिता के परिवार ने मामले में एक कथित VIP की भूमिका से जुड़े सवाल उठाए हैं।
परिवार की मांग है कि जांच में इस पहलू को भी गंभीरता से देखा जाए। उत्तराखंड सरकार ने बाद में मामले के कथित VIP एंगल की जांच के लिए CBI जांच की सिफारिश की थी। इस पहलू को लेकर परिवार और राजनीतिक दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कथित VIP की भूमिका की जांच की मांग करना और किसी व्यक्ति का दोषी साबित होना दो अलग बातें हैं। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट पर क्यों दिया धरना?
अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में 14 अक्टूबर को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरना दिया था। उनकी मांग थी कि CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी परिवार की मांगों के समर्थन में बयान दिए।
परिवार ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने और जांच में कथित VIP से जुड़े सवालों का जवाब मिलने की मांग दोहराई। विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई और परिवार की मांगों को लेकर सवाल उठाए। वहीं, मामले में कानून-व्यवस्था से संबंधित प्रशासनिक पहलुओं को अलग से देखा जाना चाहिए।
CBI जांच में किस मुद्दे पर उठ रहे सवाल?
अंकिता के परिवार की प्रमुख मांग है कि मामले में कथित VIP की पहचान और उससे संबंधित पहलुओं की जांच पूरी गंभीरता से की जाए। परिवार ने जांच की गति और कुछ परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
CBI ने इस मामले के कथित VIP एंगल की जांच शुरू की थी। जांच का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित जानकारियों के आधार पर मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल करना है।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में इसी जांच के पूरा होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। हालांकि, जांच की स्थिति, संभावित निष्कर्ष और किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी को लेकर अंतिम बात संबंधित जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही कही जा सकती है।
अब आगे क्या होगा?
राहुल गांधी की मांग के बाद अब इस मुद्दे पर राष्ट्रपति भवन और केंद्र सरकार की ओर से संभावित प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाएगा या नहीं, यह संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अंकिता के माता-पिता की मांग है कि जांच पूरी होने तक नियुक्ति को रोका जाए। दूसरी ओर, दुष्यंत गौतम ने आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में इस विवाद का राजनीतिक पक्ष और जांच का कानूनी पक्ष अलग-अलग समझना जरूरी है।
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