Yogi Adityanath on Rahul Gandhi:  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू ही जेल नहीं गए थे, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी ने भी लंबा समय जेल में बिताया था। मुख्यमंत्री गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को तेलियरगंज में महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और वंचित समाज के लिए किए गए कार्यों का जिक्र किया।

राहुल गांधी पर Yogiआदित्यनाथ ने क्या कहा?

प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी को यह बात याद रखनी चाहिए कि आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में केवल नेहरू परिवार के सदस्य ही शामिल नहीं थे।

Yogi ने महाशय मसुरियादीन पासी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और जेल में समय बिताया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मसुरियादीन पासी ने अपने जीवन के करीब नौ साल जेल में बिताए और रिहा होने के बाद भी लोगों को जागरूक करने का काम जारी रखा।

योगी ने कहा कि देश और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सभी महापुरुषों को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महापुरुषों का सम्मान किसी एक परिवार की बपौती नहीं है।

प्रयागराज में महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज के तेलियरगंज में महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

योगी ने कहा कि विकास और विरासत को महत्व देने वाली सरकार उन महापुरुषों की स्मृतियों को जीवित रखने के लिए काम कर रही है, जिनके योगदान को पर्याप्त पहचान नहीं मिली।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिस चौराहे पर प्रतिमा स्थापित की गई है, उसका नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रयागराज की किसी प्रमुख संस्था का नाम भी उनके नाम पर रखने की बात कही।

हालांकि, चौराहे और संस्था के नामकरण को लेकर प्रस्ताव तथा औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना अलग बात है। इसे अंतिम रूप से लागू हो चुका निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।

Yogi;. कौन थे महाशय मसुरियादीन पासी?

महाशय मसुरियादीन पासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य और पूर्व सांसद थे। मुख्यमंत्री के संबोधन के अनुसार, उनका जन्म 2 अक्टूबर 1911 को हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई।

Yogiआदित्यनाथ ने कहा कि मसुरियादीन पासी ने 1932 से 1944 के बीच करीब नौ साल जेल में बिताए। जेल से बाहर आने के बाद भी उन्होंने जन-जागरण का काम जारी रखा।

मसुरियादीन पासी वर्ष 1946 में संयुक्त प्रांत की विधानसभा के सदस्य बने। आजादी के बाद उन्होंने संसद में भी प्रतिनिधित्व किया। उनके राजनीतिक जीवन और सामाजिक योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ पहुंचे थे संसद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में वर्ष 1952 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से पंडित जवाहरलाल नेहरू और महाशय मसुरियादीन पासी दोनों संसद पहुंचे थे।

उस दौर में कुछ निर्वाचन क्षेत्रों से एक से अधिक प्रतिनिधि चुने जाने की व्यवस्था थी। इसी ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और देश के निर्माण में कई ऐसे नेताओं का योगदान रहा, जिन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिली।

मुख्यमंत्री के अनुसार, मसुरियादीन पासी ने वंचित समुदायों के अधिकारों और सामाजिक सम्मान से जुड़े मुद्दों को उठाया। उनके योगदान को याद करने का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में विभिन्न समुदायों और नेताओं की भूमिका को सामने लाना है।

अंग्रेजों के जरायम पेशा कानून के खिलाफ भी उठाई आवाज

योगी आदित्यनाथ ने ब्रिटिश शासन के दौरान लागू किए गए क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट यानी जरायम पेशा कानून का भी जिक्र किया। यह कानून 1871 में लागू किया गया था और इसके तहत अधिसूचित समुदायों को भेदभावपूर्ण तरीके से चिह्नित किया जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाशय मसुरियादीन पासी ने इस कानून के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने इसे वंचित और दलित समुदायों के सम्मान तथा अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

ऐतिहासिक रूप से क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट को स्वतंत्रता के बाद समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई और 1952 में इसे निरस्त कर दिया गया। इस कानून के कारण प्रभावित समुदायों के पुनर्वास और सामाजिक सम्मान का प्रश्न लंबे समय तक महत्वपूर्ण बना रहा।

पासी समाज के महापुरुषों का भी किया जिक्र

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पासी समाज से जुड़े अन्य ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख भी किया। उन्होंने महाराजा बिजली पासी और वीरांगना ऊदा देवी के योगदान को याद किया।

योगी ने कहा कि समाज के लिए संघर्ष करने वाले महापुरुषों और वीरांगनाओं की स्मृतियों को संरक्षित करना जरूरी है। उन्होंने लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के किले के पुनरुद्धार और वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित करने से जुड़े सरकारी प्रयासों का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में योगदान देने वाले लोगों को सम्मान मिलने से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती है।

राजनीतिक बयान के क्या मायने हैं?

योगी आदित्यनाथ का यह बयान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, सामाजिक न्याय और राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए महाशय मसुरियादीन पासी के योगदान को सामने रखा और कहा कि देश के लिए संघर्ष करने वाले सभी महापुरुषों को बराबर सम्मान मिलना चाहिए।

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