Punjab News : पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से 18 से 30 सितंबर के बीच ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ निकाले जाने की घोषणा के बाद आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। BJP के मुताबिक, चार यात्राएं राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेंगी और नशे के साथ कानून-व्यवस्था तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे।
AAP के वरिष्ठ नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने BJP की यात्रा को लेकर कई सवाल उठाए हैं। चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीमा ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ राजनीतिक मार्च निकालने से पहले BJP को अपने शासन वाले राज्यों और केंद्र की जिम्मेदारियों पर भी जवाब देना चाहिए।
हरपाल चीमा ने BJP से क्या सवाल पूछे?
चीमा ने गुजरात और राजस्थान से जुड़ी नशे की खेपों का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि वहां से होने वाली कथित तस्करी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने BJP से पंजाब को नशे के मुद्दे पर घेरने से पहले दूसरे राज्यों में नशा नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का हिसाब देने को कहा।
उन्होंने पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा का भी मुद्दा उठाया। चीमा के मुताबिक, सीमा सुरक्षा में केंद्र की भूमिका है और ऐसे में सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकने की जिम्मेदारी को लेकर भी जवाब दिया जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में चीमा के बयान में पंजाब की करीब 55 किलोमीटर सीमा पट्टी का जिक्र किया गया है।
तीसरा सवाल पंजाब के पानी से जुड़ा है। चीमा ने BJP से पंजाब के पानी को हरियाणा और राजस्थान की ओर दिए जाने के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
‘पंजाब को लेक्चर देने से पहले अपने राज्यों में कार्रवाई करें’
चीमा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ पंजाब तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने BJP से अपने शासन वाले राज्यों में नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की।
AAP नेता ने भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ड्रोन के जरिए होने वाली कथित तस्करी को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया गया है।
चीमा के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने राज्य के बाहर भी नशा तस्करी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की है। ये दावे AAP और पंजाब सरकार के पक्ष से सामने आए हैं।
2007 से 2017 के अकाली-भाजपा शासन का भी उठाया मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीमा ने 2007 से 2017 के बीच पंजाब में रही अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने उस दौर में राज्य में नशे की समस्या बढ़ने का आरोप लगाया।
चीमा ने कहा कि इसी अवधि में ‘चिट्टा’ शब्द पंजाब के नशा संकट से व्यापक रूप से जुड़ा। उन्होंने नशा तस्करी के मामलों की जांच और एक ED अधिकारी के तबादले का भी दावा किया। इन आरोपों के संबंध में इस रिपोर्ट में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
‘तस्करों पर कार्रवाई और नशे के मरीजों का इलाज दोनों जरूरी’
चीमा ने कहा कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों के इलाज पर भी ध्यान दे रही है। उनके मुताबिक, सरकार का फोकस तस्करों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित लोगों के पुनर्वास दोनों पर है।
उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।
गुलजार सिंह मामले पर भी चीमा का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुलजार सिंह की मौत से जुड़े सवाल पर चीमा ने कहा कि विपक्ष इस मामले पर ‘लाशों की राजनीति’ कर रहा है। उन्होंने मामले में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया और कहा कि मामला अदालत में है, इसलिए वह इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की ओर से दिया गया बयान सार्वजनिक है और लोगों ने उसे देखा है।
BJP की यात्रा 18 सितंबर से शुरू होगी
BJP की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, नशा मुक्त पंजाब यात्राएं 18 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेंगी। पार्टी ने चार अलग-अलग यात्राओं के जरिए राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की योजना बनाई है।
इस राजनीतिक अभियान के बीच नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति में एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गया है। BJP जहां राज्य में नशे की समस्या को लेकर AAP सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं AAP केंद्र और BJP शासित राज्यों की भूमिका पर सवाल उठा रही है। दोनों दलों के दावों और आरोपों के बीच आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में और चर्चा में रहने की संभावना है।