Russian Oil Ban: रूसी ईंधन पर बैन को लेकर ट्रंप ने उठाए सवाल, बोले- कानून देखूंगा; फिलहाल नहीं किया कोई बदलाव

Donald Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से Oil उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंध को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि वह इस कानून की समीक्षा करेंगे, लेकिन फिलहाल इसमें किसी तरह के बदलाव का ऐलान नहीं किया है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उनके प्रशासन की ओर से रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेनदेन को मंजूरी दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका की रूस संबंधी ऊर्जा नीति और यूक्रेन युद्ध के बीच लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। खास बात यह है कि अमेरिकी कानून रूसी पेट्रोलियम के आयात पर प्रतिबंध लगाता है, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक अलग लाइसेंस के जरिए रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेनदेन की अनुमति दी है।

ट्रंप ने रूसी Oil आयात प्रतिबंध कानून पर क्या कहा?

वाशिंगटन में ओवल ऑफिस में मौजूदगी के दौरान एक पत्रकार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रूस से आने वाले डीजल के एक टैंकर को लेकर सवाल पूछा। पत्रकार ने बताया कि अमेरिकी कांग्रेस ने 2022 में रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पारित किया था, जिस पर तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हस्ताक्षर किए थे।

इस पर ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "शायद यही इसे काफी खराब कानून बनाता है। मैं इसे जरूर देखूंगा।"

दरअसल, पत्रकार ने ट्रंप से पूछा था कि अटलांटिक महासागर के पार रूसी डीजल लेकर आ रहे एक टैंकर के अमेरिका पहुंचने और उसके कार्गो को उतारने पर कानूनी प्रतिबंध का क्या होगा।

शुरुआत में ट्रंप ने पूछा कि क्या यह मामला जोन्स एक्ट से संबंधित है। हालांकि, पत्रकार ने स्पष्ट किया कि सवाल 2022 में बनाए गए रूस से तेल आयात प्रतिबंध कानून को लेकर है।

ट्रंप ने कानून की समीक्षा करने की बात तो कही, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी सरकार इसमें संशोधन करने जा रही है या प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही है।

2022 में बाइडेन ने लागू किया था रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने मॉस्को पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसी क्रम में 8 अप्रैल 2022 को तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूसी तेल के आयात को समाप्त करने से संबंधित कानून पर हस्ताक्षर किए थे।

इस कानून के तहत अमेरिकी टैरिफ अनुसूची के अध्याय 27 में वर्गीकृत रूसी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया।

इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई को सीमित करना और यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई पर आर्थिक दबाव बनाना था।

कानून में प्रतिबंध समाप्त करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ शर्तों से संबंधित प्रमाणन देना आवश्यक है।

इनमें यूक्रेन द्वारा स्वीकृत रूसी वापसी और शत्रुता समाप्त करने का समझौता, नाटो सदस्य देशों के लिए तत्काल रूसी सैन्य खतरे का अभाव और यूक्रेन के लोगों के अपनी सरकार चुनने के अधिकार की मान्यता शामिल है।

इसके अलावा, प्रतिबंध समाप्त करने की प्रक्रिया से पहले कांग्रेस की संबंधित समितियों से परामर्श करना भी जरूरी है। राष्ट्रपति के प्रमाणन के बाद 90 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान कांग्रेस अस्वीकृति का प्रस्ताव पारित कर सकती है।

ट्रेजरी विभाग ने रूसी डीजल को लेकर दी थी विशेष मंजूरी

इस पूरे विवाद की एक अहम वजह अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की ओर से जारी विशेष लाइसेंस है।

9 अक्टूबर को OFAC ने जनरल लाइसेंस 135 जारी किया था। इसके तहत रूस से जुड़े दो प्रकार के प्रतिबंध नियमों के बावजूद रूसी मूल के डीजल की बिक्री, डिलीवरी, उतराई और आयात से संबंधित कुछ लेनदेन को अधिकृत किया गया।

इस लाइसेंस में अमेरिका में डीजल के आयात को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसकी वैधता 7 अप्रैल 2027 तक निर्धारित की गई है।

हालांकि, इस मंजूरी के साथ कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। इसके तहत रूस के केंद्रीय बैंक, राष्ट्रीय संपत्ति कोष या वित्त मंत्रालय के अमेरिकी वित्तीय संस्थानों में मौजूद खातों से भुगतान संबंधी लेनदेन को बाहर रखा गया है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जनरल लाइसेंस 135 केवल निर्धारित शर्तों के तहत रूसी मूल के डीजल से जुड़े लेनदेन को मंजूरी देता है। इसे रूस के सभी पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को सामान्य रूप से खोलने की अनुमति नहीं माना जा सकता।

रूसी डीजल की मंजूरी पर न्यू जर्सी की गवर्नर ने जताई आपत्ति

ट्रंप की टिप्पणी से तीन दिन पहले यानी 2 नवंबर को न्यू जर्सी की गवर्नर मिकी शेरिल ने भी इस मामले पर आपत्ति जताई थी।

उन्होंने बंदरगाहों और टर्मिनल संचालकों को पत्र लिखकर रूसी ईंधन के आयात से जुड़े ट्रेजरी विभाग के फैसले को चुनौती दी।

शेरिल ने कहा कि रूसी ईंधन के आयात को लेकर ट्रंप प्रशासन की मंजूरी सीधे संघीय कानून के खिलाफ है।

उनका तर्क है कि 2022 के कानून ने अमेरिकी कार्यपालिका को लाइसेंस जारी करके प्रतिबंध को व्यापक रूप से माफ करने का अधिकार नहीं दिया है।

उन्होंने व्यवसायों को ऐसे ईंधन को स्वीकार करने के खिलाफ चेतावनी भी दी। साथ ही कहा कि न्यू जर्सी सरकार रूसी ईंधन के आयात का विरोध करने के लिए उपलब्ध कानूनी और नियामक शक्तियों का इस्तेमाल करेगी।

क्या अमेरिका में रूसी तेल पर प्रतिबंध हटने वाला है?

डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने जा रहा है?

फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब नहीं है। ट्रंप ने केवल कानून की समीक्षा करने की बात कही है। उन्होंने न तो प्रतिबंध हटाने की घोषणा की है और न ही किसी नए संशोधन या समयसीमा का ऐलान किया है।

वहीं, ट्रेजरी विभाग का विशेष लाइसेंस और 2022 का संघीय कानून अलग-अलग कानूनी प्रावधानों से जुड़े हैं। इसी वजह से रूसी डीजल की मंजूरी को लेकर कानूनी विवाद सामने आया है।

अब इस मामले में अमेरिकी प्रशासन का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। यदि ट्रंप प्रशासन रूसी पेट्रोलियम आयात प्रतिबंध में बदलाव करना चाहता है, तो उसे मौजूदा कानून में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और कांग्रेस की भूमिका को ध्यान में रखना होगा।

फिलहाल ट्रंप के बयान ने अमेरिका की रूस नीति, ऊर्जा व्यापार और यूक्रेन युद्ध से जुड़े प्रतिबंधों पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

यह भी पढ़ें - UP Police Recruitment: तीसरी सरकार बनने पर भी बांटेंगे पत्र