नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने व्यापक जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा केवल हिंसा में शामिल लोगों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि घटनाओं के पीछे कोई सुनियोजित साजिश या संगठित प्रयास था या नहीं।
पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध डिजिटल व तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिंसा के सिलसिले में अब तक 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। विभिन्न स्थानों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने और सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प की घटनाएं सामने आईं, जिनमें करीब 50 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी है।
कुछ हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान की जांच
सूत्रों का कहना है कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों के बारे में यह जांच की जा रही है कि क्या वे वास्तव में छात्र हैं या नहीं। पुलिस उनकी पहचान, संबद्धता और प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका की पुष्टि कर रही है।
सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच
जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने और हिंसा भड़काने में किन लोगों की भूमिका थी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या हिंसा पूर्व नियोजित थी या किसी संगठित समूह द्वारा इसे अंजाम दिया गया।
सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच का एक अहम हिस्सा सोशल मीडिया गतिविधियों से भी जुड़ा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान कुछ सोशल मीडिया खातों से भ्रामक और भड़काऊ सामग्री साझा किए जाने की बात सामने आई है।
जांचकर्ता ऐसे पोस्ट और खातों की पड़ताल कर रहे हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर गलत जानकारी फैलाकर माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स की भी जांच
पुलिस सूत्रों का दावा है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पाकिस्तान स्थित हैंडल्स से साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने, घायल होने और गिरफ्तार किए जाने जैसे दावे किए गए। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद से इन पोस्टों के स्रोत और संभावित समन्वित ऑनलाइन अभियान की भी जांच कर रही है।
साजिश के सबूत मिलने पर होगी कानूनी कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक समूह की हिंसा की योजना बनाने, उसे भड़काने या वित्तीय सहायता देने में संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई करते समय किसी भी प्रकार की राजनीतिक संबद्धता को आधार नहीं बनाया जाएगा और जांच पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित होगी।