नीट परीक्षा पेपर लीक मामले और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। आज, 10 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, दीपके ने घोषणा की कि 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह कदम छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाता है, जो परीक्षा घोटालों से आहत हैं।
'शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो, वरना देशव्यापी आंदोलन': दीपके की चेतावनी
दीपके ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। इस आंदोलन की शुरुआत पुणे से होगी और इसके बाद लखनऊ, बेंगलुरु सहित देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में प्रदर्शनों की श्रृंखला जारी रहेगी। उन्होंने 6 जून को जंतर-मंतर पर हुए पिछले आंदोलन को छात्रों और युवाओं से मिले अभूतपूर्व समर्थन का उल्लेख किया और बताया कि उसी गति को बनाए रखते हुए अब पुणे में एक बड़ा आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन की अनुमति मिल चुकी है।
परीक्षा नहीं, भविष्य का सवाल: आंदोलन का राष्ट्रीय विस्तार
अभिजीत दीपके ने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और संपूर्ण शिक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता का प्रश्न है। उन्होंने कहा, "यदि सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देती और शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तो 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।" इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की उनकी योजना शिक्षा क्षेत्र में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
अभिभावकों से भावुक अपील: 'बच्चों को आवाज उठाने से न रोकें'
इस दौरान, दीपके ने देश भर के अभिभावकों से एक मार्मिक अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी बात रखने और सवाल पूछने से रोकना नहीं चाहिए। अपनी व्यक्तिगत चिंता साझा करते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे उनकी माँ भारत लौटने पर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं, इस डर से कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उन पर हमला हो सकता है। लेकिन उन्होंने अपनी माँ को समझाया कि किसी न किसी को तो आवाज उठानी ही होगी।
दीपके ने आगे कहा, "जब तक केवल एक व्यक्ति आवाज उठाता है, उसे दबाने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन जब लाखों-करोड़ों छात्र एक साथ बोलेंगे, तो किसी की हिम्मत नहीं होगी कि उनकी आवाज को दबा सके।" यह अपील छात्रों को सशक्त बनाने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास है।
'जेल जाने को भी तैयार, भारत में ही करूंगा संघर्ष'
पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर कि क्या वे आंदोलन के कारण जेल जाने को तैयार हैं, अभिजीत दीपके ने दृढ़ता से कहा, "यदि आंदोलन के कारण मुझे जेल भी जाना पड़े तो मैं इसके लिए तैयार हूं।" उन्होंने छात्रों को डरने की जरूरत नहीं होने की सलाह दी और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को सवाल पूछने और अपनी राय व्यक्त करने से न रोकें। उन्होंने कहा, "मैं उनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं, लेकिन उनकी आवाज मत दबाइए।" जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे फिर से अमेरिका लौटेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "अब मैं भारत में ही रहूंगा।" यह घोषणा उनके भारत में रहकर संघर्ष जारी रखने के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।