पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी घमासान जारी है। इसी बीच, टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने राजारहाट-न्यू टाउन सीट के चुनाव परिणाम पर एक बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली होने का दावा करते हुए इसे भविष्य के लिए एक 'टेक्स्टबुक' उदाहरण बताया है।
सागरिका घोष का तीखा हमला
सागरिका घोष ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'जब 2026 के बंगाल विधानसभा चुनावों का इतिहास लिखा जाएगा, तो राजारहाट-न्यू टाउन का 'नतीजा' धांधली वाले फैसले के एक सटीक (टेक्स्टबुक) उदाहरण के तौर पर दर्ज होगा। अगर न्याय हुआ, तो अदालतों में इसे निश्चित रूप से पलट दिया जाएगा।' उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
बूथ नंबर 164: चौंकाने वाले आंकड़े
राजारहाट-न्यू टाउन के बूथ नंबर 164 के चुनावी नतीजों ने स्थानीय नागरिकों, राजनीतिक विश्लेषकों और कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया है। कई लोग इन परिणामों को सांख्यिकीय रूप से असंभव बता रहे हैं। इस बूथ पर सामने आए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।
- CPI(M)-ISF गठबंधन के उम्मीदवार सप्तर्षि देब को सिर्फ 1 वोट मिला।
- TMC उम्मीदवार तापस चटर्जी को महज 5 वोट मिले।
- वहीं, बीजेपी (BJP) उम्मीदवार पीयूष कनोडिया को कुल 656 वोटों में से 637 वोट मिल गए।
जनसांख्यिकी और विरोधाभास
इस विवाद की सबसे बड़ी वजह इस क्षेत्र की जनसांख्यिकी (Demographics) है। बूथ संख्या 164 और 165 'मुसलमान पारा' नाम के इलाके में आते हैं, जो पूरी तरह मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। विशेष रूप से, बूथ संख्या 164 में 88% मतदाता मुस्लिम हैं। ऐसे में बीजेपी को एकतरफा 97% वोट मिलना कई सवाल खड़े करता है।
पास के ही बूथ नंबर 165 में, जहां इसी इलाके और कई मामलों में एक ही परिवार के लोग वोट डालते हैं, परिणाम बिल्कुल विपरीत थे। वहां बीजेपी को केवल 32 वोट मिले, जबकि सीपीएम को 299 और टीएमसी को 290 वोट प्राप्त हुए। स्थानीय लोगों ने मीडिया आउटलेट 'ऑल्ट न्यूज़' को बताया कि बूथ 164 के यह नतीजे जमीनी हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाते।
गिनती का वो 18वां राउंड, जिसने पलट दी बाजी
न्यू टाउन सीट के नतीजे 5 मई को घोषित किए गए, जो बाकी बंगाल के नतीजों से एक दिन बाद आए थे। इस सीट पर पहले से तय 17 राउंड के बजाय 18वें राउंड तक वोटों की गिनती खींची गई। निर्वाचन क्षेत्र में कुल 330 पोलिंग स्टेशन थे। नियमानुसार हर राउंड में 20 ईवीएम की गिनती होनी थी, जिससे 17वें राउंड में गिनती पूरी हो जानी चाहिए थी (16 राउंड में 20-20 ईवीएम और आखिरी 17वें राउंड में बची हुई 10 ईवीएम)।
क्यों पड़ी 18वें राउंड की जरूरत?
दरअसल, पोलिंग के दिन बूथ नंबर 164 पर ईवीएम (EVM) में दर्ज वोटों और असल में पड़े वोटों में 52 मतों का अंतर (अतिरिक्त वोट) देखा गया था। इस विसंगति के कारण दो घंटे वोटिंग रुकी रही थी। राजनीतिक दलों के एजेंटों ने बूथ 164 के लिए VVPAT पर्चियों की मैन्युअल गिनती की मांग की थी। इसी वीवीपैट पर्चियों की गिनती के लिए विशेष रूप से 18वां राउंड रखा गया।
आखिरी क्षणों का पलटवार
17वें राउंड की समाप्ति तक टीएमसी के तापस चटर्जी 316 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे थे और उनकी जीत तय मानी जा रही थी। लेकिन बिल्कुल आखिर में, 18वें राउंड (बूथ 164) की गिनती ने पासा पलट दिया। इस राउंड में सामने आए 656 वोटों में से बीजेपी को 637 और टीएमसी को सिर्फ 5 वोट मिले। इस भारी अंतर की बदौलत बीजेपी उम्मीदवार पीयूष कनोडिया ने टीएमसी की बढ़त को पछाड़ते हुए ठीक 316 वोटों के अंतर से इस सीट पर नाटकीय जीत हासिल कर ली। इस पूरे घटनाक्रम ने राजारहाट न्यू टाउन के चुनावी नतीजों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर राजनीतिक बहस जारी है।