आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने बांग्लादेश के मंगला पोर्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में चीन की भागीदारी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि भारत के पड़ोसी देशों में रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिसे उन्होंने भारत की विदेश नीति के लिए चिंता का विषय बताया।
सोशल मीडिया पर क्या बोले अनुराग ढांडा?
अनुराग ढांडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मोदी सरकार के दौरान भारत का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव कमजोर हुआ है और कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भारत के हाथ से निकलकर चीन के पास जा रही हैं।
उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि इससे पहले ईरान के चाबहार पोर्ट से जुड़ी परियोजना भी भारत के हाथ से निकलकर चीन के पास चली गई थी। हालांकि, यह राजनीतिक टिप्पणी है और सरकार की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मंगला पोर्ट क्यों है महत्वपूर्ण?
मंगला पोर्ट बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है। यह भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस बंदरगाह के माध्यम से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों—असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और अन्य क्षेत्रों—तक सामान पहुंचाने में समय और परिवहन लागत कम हो सकती है। इसी वजह से यह परियोजना सामरिक और व्यापारिक दोनों दृष्टि से अहम मानी जाती है।
हालिया घटनाक्रम क्या है?
हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश ने मंगला में उस आर्थिक क्षेत्र के विकास के लिए एक चीनी सरकारी कंपनी के साथ समझौता किया है, जो पहले भारत समर्थित परियोजना के लिए चिन्हित भूमि पर प्रस्तावित था। यह घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश-चीन के रणनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या?
मंगला पोर्ट परियोजना में चीन की बढ़ती भागीदारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि भारत सरकार इस घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं और भविष्य में इस क्षेत्र में अपनी रणनीति किस तरह आगे बढ़ाती है।