चंडीगढ़ : श्री अकाल तख्त साहिब (Sri Akal Takht Sahib) द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को धार्मिक कदाचार का दोषी ठहराए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर सीधा हमला बोला है।

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि क्या वह मुख्यमंत्री भगवंत मान से पद छोड़ने के लिए कहेंगे।

रंधावा बोले- करोड़ों सिखों की भावनाएं आहत

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के फैसले के बाद देश और विदेश में बसे करोड़ों सिखों के बीच गहरा दुख और नाराजगी है। उनका कहना है कि इस स्थिति में भगवंत मान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर भगवंत मान ऐसा नहीं करते हैं, तो आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह उनसे इस्तीफा मांगेंगे।

रंधावा ने कहा कि पंजाब की जनता यह जानना चाहती है कि आम आदमी पार्टी सिख भावनाओं और श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा के साथ खड़ी है या फिर सत्ता बचाने के लिए चुप्पी साधे हुए है।

कांग्रेस ने भी उठाई इस्तीफे की मांग

इससे पहले पंजाब कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया था कि श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को "गुरु-द्रोही" और "पंथ विरोधी" घोषित किया है।

कांग्रेस का कहना है कि कथित वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी ने कहा कि अकाल तख्त ने सिख संगत से मुख्यमंत्री मान के साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की है।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस फैसले के बाद भगवंत मान मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सोमवार को अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज (Giani Kuldeep Singh Gargaj) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का दोषी घोषित किया।

यह फैसला एक कथित वायरल वीडियो के आधार पर लिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री पर सिख गुरुओं के चित्रों पर शराब छिड़कने का आरोप लगाया गया है। इसी मामले को लेकर अकाल तख्त ने कड़ा रुख अपनाया है।

'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार

अकाल तख्त ने अपने फैसले में भगवंत मान को "गुरु दोखी" और "खालसा पंथ विरोधी" करार देते हुए सिख समुदाय से उनके साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध समाप्त करने की अपील की है।

इसके साथ ही अकाल तख्त ने यह भी निर्देश दिया है कि पंजाब के सभी सिख विधायक, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित हों।

पंजाब की राजनीति में बढ़ सकता है विवाद

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि श्री अकाल तख्त के इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में विवाद और गहरा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी पर लगातार हमलावर है, जबकि अब सबकी नजर मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

आने वाले दिनों में यह मामला पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।