7 November 2026 Panchang: 7 नवंबर का पंचांग, सुबह 9:25 से 10:47 बजे तक रहेगा राहुकाल, पूर्व दिशा में यात्रा से बचें
7 November 2026 Panchang: शनिवार, 7 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। इस दिन राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, खरीदारी या यात्रा से पहले पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त देखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
आइए जानते हैं 7 नवंबर 2026 का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और ग्रहों की स्थिति।
7 नवंबर 2026 का पंचांग (7 November Panchang)
- दिन: शनिवार
- मास: कार्तिक
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: त्रयोदशी, सुबह 10:48 बजे तक
- इसके बाद: चतुर्दशी तिथि
- सूर्योदय: सुबह 6:39 बजे
- सूर्यास्त: शाम 5:41 बजे
- चंद्रोदय: तड़के 4:39 बजे
- चंद्रास्त: शाम 4:18 बजे
- नक्षत्र: विशाखा
- योग: प्रीति योग, अगले दिन सुबह 3:27 बजे तक
- करण: मूल स्रोत में उपलब्ध नहीं
7 नवंबर के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
शनिवार को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल को महत्वपूर्ण माना गया है।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ समयों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है। इस दौरान पूजा-पाठ, मांगलिक कार्यों और महत्वपूर्ण निर्णयों से जुड़े काम किए जा सकते हैं।
अमृतकाल: रात 11:09 बजे से 12:49 बजे तक।
अमृतकाल को ज्योतिष में अत्यंत शुभ समय माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए कार्य सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। नए कार्यों की योजना, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए इसे शुभ माना जाता है।
7 नवंबर को राहुकाल का समय (Rahu Kaal Time)
शनिवार को राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा।
हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इस अवधि में नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि राहुकाल के दौरान शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
हालांकि, पहले से चल रहे नियमित काम इस दौरान जारी रखे जा सकते हैं। राहुकाल का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर निर्धारित होता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में इसमें अंतर हो सकता है।
शनिवार को यमगंड और गुलिक काल
यमगंड काल: दोपहर 1:33 बजे से 2:56 बजे तक।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यमगंड काल में किसी नए शुभ कार्य की शुरुआत करना उचित नहीं माना जाता। इस दौरान नया कारोबार शुरू करने, महत्वपूर्ण यात्रा पर निकलने और मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
गुलिक काल: सुबह 6:39 बजे से 8:02 बजे तक।
गुलिक काल को भी पारंपरिक पंचांग में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। हालांकि पहले से जारी काम किए जा सकते हैं।
7 नवंबर को पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक दिन एक विशेष दिशा में दिशाशूल माना जाता है।
शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए यदि संभव हो तो इस दिशा में यात्रा करने से बचें। जरूरी यात्रा होने पर लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारंपरिक उपाय भी करते हैं।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्य की स्थिति: शनिवार को सूर्य देव तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना गया है। सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, तुला राशि में सूर्य की स्थिति व्यक्ति को फैसले लेने में अधिक विचारशील बना सकती है। इस दौरान संतुलन और धैर्य बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
चंद्रमा की स्थिति: चंद्र देव शनिवार को कन्या राशि में रहेंगे और शाम 5:15 बजे तुला राशि में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिष के अनुसार, कन्या राशि में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति को अधिक तार्किक और विश्लेषणात्मक बना सकती है। इस दौरान भावनाओं के बजाय सोच-विचार और समझदारी से निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ने की मान्यता है।
विशाखा नक्षत्र और प्रीति योग का महत्व
इस दिन सूर्य विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। विशाखा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता इंद्र और अग्नि माने जाते हैं। ज्योतिष में इस नक्षत्र को लक्ष्य प्राप्ति, महत्वाकांक्षा, मेहनत और सफलता से जोड़कर देखा जाता है।
वहीं शनिवार को प्रीति योग रहेगा, जो अगले दिन सुबह 3:27 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा।
प्रीति योग को 27 नित्य योगों में दूसरा स्थान प्राप्त है। इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग में जन्म लेने वाले लोग मिलनसार, सौम्य और मधुरभाषी स्वभाव के हो सकते हैं।
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