पंजाब की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। पटियाला जिले के पातड़ां में शिरोमणि अकाली दल को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की पूर्व विधायक वनिंदर कौर लूंबा और वरिष्ठ नेता करण सिंह डीटीओ अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में दोनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

इस राजनीतिक घटनाक्रम को आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पातड़ां और आसपास के क्षेत्रों में इसका असर स्थानीय राजनीति पर पड़ सकता है।

भगवंत मान ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी में शामिल हुए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार जमीनी स्तर पर मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेताओं और कार्यकर्ताओं के जुड़ने से संगठन को नई ताकत मिलेगी और क्षेत्र में पार्टी का जनाधार और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि नए साथी पार्टी की नीतियों और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

'सरकार के कामों पर जनता की मुहर'

भगवंत मान ने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं और बड़ी संख्या में समर्थकों का आम आदमी पार्टी में शामिल होना इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों को लोगों का समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य जनहित से जुड़े क्षेत्रों में किए गए कार्यों की वजह से लोगों का भरोसा पार्टी पर लगातार बढ़ रहा है।

पातड़ां की राजनीति पर पड़ सकता है असर

पूर्व विधायक वनिंदर कौर लूंबा और करण सिंह डीटीओ का आम आदमी पार्टी में शामिल होना पातड़ां क्षेत्र की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं की क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान और समर्थकों के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है।

ऐसे में उनके 'आप' में आने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि शिरोमणि अकाली दल के लिए इसे एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक हलचल

पंजाब में जैसे-जैसे राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं, विभिन्न दलों के नेताओं का एक-दूसरे की पार्टी में शामिल होने का सिलसिला भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे घटनाक्रम आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह के राजनीतिक बदलाव सभी प्रमुख दलों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।