नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी की गई, जिसका असर आज भी सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में दिखाई देता है।
कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके स्थित बिधाननगर अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य के कई प्रशासनिक क्षेत्रों की तरह स्वास्थ्य क्षेत्र भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है और इसमें सुधार की आवश्यकता है।
डॉ. बिधान चंद्र रॉय और ज्योति बसु का किया उल्लेख
अपने संबोधन में सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रख्यात चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय का उल्लेख किया, जिनकी जयंती पर हर वर्ष देशभर में नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का जिक्र करते हुए कहा कि डॉ. रॉय ने राज्य के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहल पहले ही शुरू कर दी थीं। अधिकारी ने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था में उन बुनियादी ढांचों को पर्याप्त मजबूती नहीं मिल सकी।
'स्वास्थ्य सेवाओं को राजनीति से मुक्त करना होगा'
सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सेवाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप और पक्षपात जैसी प्रवृत्तियों से व्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को पारदर्शी और पेशेवर तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा सेवाओं में भाई-भतीजावाद या राजनीतिक प्रभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और मरीजों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता होने चाहिए।
आयुष्मान भारत योजना का भी किया जिक्र
अपने भाषण में सुवेंदु अधिकारी ने आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से राज्य में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की वकालत करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इस योजना को राज्य में लागू नहीं होने दिया गया, जिससे पात्र लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका।
'दूसरे राज्यों में इलाज कराने क्यों जाते हैं मरीज?'
विपक्ष के नेता ने यह भी सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल के बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख क्यों करते हैं। उनके अनुसार, राज्य में ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, जिससे लोगों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल प्रतिभाशाली डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों का राज्य रहा है और यहां की स्वास्थ्य सेवाओं को उसी स्तर तक पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर जारी है राजनीतिक बहस
पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समय-समय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर सुवेंदु अधिकारी के इस बयान ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
हालांकि, इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से इस बयान के संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।