Punjab News: नानकसर संप्रदाय के प्रमुख बाबा लक्खा सिंह ने मंगलवार को चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने पंजाब विधानसभा से पारित जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 की सराहना की.
बाबा लक्खा सिंह ने कहा कि यह कानून श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान और पवित्रता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे बेअदबी की घटनाओं पर रोक लगाने और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करने में मदद मिलेगी.
बाबा लक्खा सिंह ने क्या कहा?
मुलाकात के दौरान बाबा लक्खा सिंह ने कहा कि कानून का पारित होना सिख समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है. उनके मुताबिक, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा और पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था जरूरी है.
उन्होंने कहा कि बेअदबी की घटनाओं ने सिख समुदाय की भावनाओं को आहत किया है और नया कानून ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक निवारक व्यवस्था के तौर पर काम कर सकता है.
बाबा लक्खा सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिरोपा भी भेंट किया. मुख्यमंत्री ने इसे गुरु घर की ओर से मिले आशीर्वाद के रूप में स्वीकार किया.
भगवंत मान ने कानून को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान, पवित्रता और मर्यादा को कायम रखना राज्य सरकार का मूल कर्तव्य है.
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस कानून के जरिए बेअदवी की घटनाओं के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह इस कार्य को गुरु साहिब की सेवा के रूप में देखते हैं.
मान के मुताबिक, पंजाब सरकार राज्य में शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए काम कर रही है.
क्या है गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन कानून 2026?
जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 ने 2008 के मूल कानून में कई बदलाव किए हैं. पंजाब विधानसभा ने इसे 13 अप्रैल 2026 को पारित किया था और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे अधिसूचित किया गया.
कानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण, वितरण और आपूर्ति से जुड़े प्रावधानों को भी विस्तार दिया गया है. इसके साथ बेअदबी यानी जानबूझकर अपवित्रता फैलाने वाले कृत्यों की परिभाषा और दंड व्यवस्था को मजबूत किया गया है.
संशोधित कानून में ऐसे अपराध के लिए, परिस्थितियों के आधार पर, 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है. आपराधिक साजिश के जरिए बेअदबी करने के मामलों में भी कड़े दंड का प्रावधान है.
कानून को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
हालांकि इस कानून को लेकर पंजाब में सभी पक्षों की राय एक जैसी नहीं रही है. जून और जुलाई 2026 में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए गए और सरकार से संबंधित बदलावों पर विचार करने को कहा गया था.
जुलाई में पंजाब सरकार ने अकाल तख्त सचिवालय को अपना जवाब सौंपा था. उस समय अकाल तख्त की ओर से कहा गया था कि सरकार के जवाब की समीक्षा की जाएगी और सिख संस्थाओं की सहमति के बिना आगे संशोधन स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
इसलिए बाबा लक्खा सिंह की मौजूदा सराहना को उनके और नानकसर संप्रदाय के रुख के तौर पर देखना उचित है, न कि पूरे सिख समुदाय या सभी धार्मिक संस्थाओं की एकसमान राय के तौर पर.
मुलाकात में सिरोपा भेंट किया गया
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मुलाकात की तस्वीरें और जानकारी साझा करते हुए बाबा लक्खा सिंह का आभार जताया. उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा और पवित्रता बनाए रखना उनकी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में है.
बाबा लक्खा सिंह की ओर से मुख्यमंत्री को सिरोपा भेंट किया गया. दोनों के बीच कानून, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा और बेअदवी की घटनाओं को रोकने से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई.
पंजाब में बेअदबी कानून पर आगे भी नजर
गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन कानून के लागू होने के बाद भी इससे जुड़े कानूनी और धार्मिक पहलुओं पर चर्चा जारी है. सरकार इसे बेअदवी के खिलाफ सख्त कानूनी व्यवस्था के रूप में पेश कर रही है, जबकि कुछ सिख संस्थाओं और कानूनी विशेषज्ञों ने कानून के दायरे और प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग आपत्तियां जताई हैं.