गुजरात में Gujarat Political Donation Scam से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. गुजरात पुलिस की CID Crime ने आयकर विभाग की शिकायतों के आधार पर तीन Registered Unrecognised Political Parties यानी RUPPs और उनसे जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ तीन अलग-अलग FIRs दर्ज की हैं.
FIR में आरोप है कि इन राजनीतिक दलों के जरिए करीब 1,870 करोड़ रुपये के कथित फर्जी राजनीतिक चंदे का लेन-देन किया गया और इस व्यवस्था से सरकारी खजाने को 560 करोड़ रुपये से ज्यादा के टैक्स नुकसान का अनुमान है. मामला फिलहाल जांच के अधीन है और आरोप अदालत में साबित होना बाकी है.
किन तीन राजनीतिक दलोंके खिलाफर FIR हुई?
गुजरात पुलिस की कार्रवाई Bharatiya National Janata Dal यानी BNJD, Swatantrata Abhivyakti Party यानी SAP और Garib Kalyan Party यानी GKP के खिलाफ हुई है.
Indian Express के मुताबिक, BNJD से जुड़े मामले में करीब 1,143.85 करोड़ रुपये के कथित चंदे और करीब 343 करोड़ रुपये के टैक्स नुकसान का जिक्र है. SAP पर करीब 519 करोड़ रुपये के कथित फर्जी चंदे और करीब 155 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है. वहीं GKP के मामले में करीब 206.76 करोड़ रुपये और करीब 62 करोड़ रुपये के कथित टैक्स नुकसान का उल्लेख है.
इन तीनों रकम को जोड़ने पर कथित चंदे की राशि करीब 1,870 करोड़ रुपये और अनुमानित टैक्स नुकसान 560 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है.
BNJD के मामले में क्या आरोप हैं?
तीनों मामलों में सबसे बड़ी रकम BNJD से जुड़ी है. आयकर विभाग की शिकायत के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच पार्टी के खाते में 56,238 कथित दानदाताओं से 1,143.85 करोड़ रुपये आए.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन रकम के बदले दान की रसीदें जारी की गईं, जिनका इस्तेमाल दानदाताओं ने आयकर कानून के तहत उपलब्ध टैक्स कटौती का दावा करने के लिए किया. इसके बाद पैसा कथित तौर पर दूसरी फर्मों के खातों में भेजा गया.
BNJD के अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार गजेरा, महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा और CA-ऑडिटर आदिल सैयद को FIR में आरोपी बनाया गया है. शिकायत में गजेरा को कथित तौर पर इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी और संचालनकर्ता बताया गया है.
कैसे चलता था कथित 'डोनेशन' का खेल?
आयकर विभाग की शिकायत के मुताबिक, कथित व्यवस्था में पहले रकम बैंकिंग चैनल के जरिए राजनीतिक दल के खाते में भेजी जाती थी. इसके बदले दान की रसीद जारी की जाती थी.
इसके बाद पैसा कथित तौर पर कुछ मध्यस्थ फर्मों के खातों में ट्रांसफर किया जाता था. शिकायत में फर्जी बिल और इनवॉयस के जरिए लेन-देन को सामान्य कारोबारी गतिविधि की तरह दिखाने का आरोप है.
इसके बाद कथित तौर पर नकदी निकाली जाती थी और कमीशन काटकर बाकी रकम मूल दानदाताओं तक वापस पहुंचाई जाती थी. BNJD से जुड़े मामले में शिकायत में 2 से 10 प्रतिशत तक कमीशन काटे जाने और बाकी रकम को कथित तौर पर Angadiya चैनल या हवाला नेटवर्क के जरिए लौटाने का आरोप है.
यानी जांच एजेंसियों के आरोपों के मुताबिक, बैंकिंग चैनल के जरिए आया पैसा कथित तौर पर कुछ फर्मों के माध्यम से घुमाकर फिर नकद रूप में वापस किया जाता था.
चुनाव आयोग को भी गलत जानकारी देने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित लेन-देन को वैध राजनीतिक चंदे के तौर पर दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज और Contribution Reports तैयार किए गए.
BNJD मामले में Form 24A से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल रूप से साइन की गई रिपोर्ट चुनाव आयोग के सामने जमा किए जाने का आरोप है. जांच एजेंसियां अब यह भी देख रही हैं कि इन दस्तावेजों को तैयार करने और प्रमाणित करने में संबंधित लोगों की क्या भूमिका थी.
आयकर विभाग की शिकायत में CA और ऑडिटर आदिल सैयद पर भी पार्टी के खातों की पर्याप्त जांच किए बिना ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने और डिजिटल सिग्नेचर करने का आरोप लगाया गया है.
तीनों पार्टियों का चुनावी रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
तीनों राजनीतिक दल गुजरात में 2017 से चुनाव लड़ते रहे हैं. Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके उम्मीदवारों ने चुनावों में अपनी जमानत राशि गंवाई है.
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि सीमित चुनावी प्रदर्शन के बावजूद इन पार्टियों के दस्तावेजों में बहुत बड़ी रकम के राजनीतिक चंदे का उल्लेख कैसे हुआ. हालांकि, केवल कम वोट या जमानत जब्त होने से किसी राजनीतिक दल के वित्तीय लेन-देन को अवैध साबित नहीं किया जा सकता. इस मामले में वास्तविक निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.
अब आगे क्या होगा?
गुजरात CID Crime ने आयकर विभाग की शिकायतों के आधार पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब कथित लेन-देन, बैंक खातों, संबंधित फर्मों, दस्तावेजों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है.
BNJD मामले में आयकर विभाग की नवंबर 2025 की तलाशी और उसके बाद हुई जांच को FIR की कार्रवाई का आधार बताया गया है. शिकायत में डिजिटल रिकॉर्ड, रसीदों और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों का भी जिक्र है.
फिलहाल 1,870 करोड़ रुपये के कथित फर्जी चंदे और 560 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनुमानित टैक्स नुकसान का मामला जांच के स्तर पर है. आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है.