Naseeruddin  शाह ने BJP पर साधा निशाना

कोलकाता: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आलोचना करते हुए कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया है। अभिनेता ने आरोप लगाया कि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी विरोधी विचार रखने वाले लोगों को निशाना बना रही है।

नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि संस्थान में अपनी शिकायतें उठाने वाले विद्यार्थियों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई और उनके भविष्य को लेकर चिंता जताई।

अभिनेता के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और फिल्मी जगत में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, बीजेपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभिनेता के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

SRFTI में छात्रों का प्रदर्शन क्यों हो रहा है?

कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट में छात्रों का विरोध परिसर में हुई झड़पों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के बीच सामने आया है।

रिपोर्टों के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को संस्थान परिसर में छात्रों और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) से जुड़े लोगों के बीच टकराव हुआ था। इस घटना में कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद 4 अक्टूबर को भी परिसर में एक अन्य टकराव की सूचना मिली।

इन घटनाओं के बाद छात्रों ने संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था, बाहरी संगठनों की गतिविधियों और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि घटनाओं की जिम्मेदारी तय की जाए और परिसर में सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित किया जाए।

12 अक्टूबर से धरने पर बैठे छात्र

रिपोर्टों के मुताबिक, SRFTI के छात्र 12 अक्टूबर से संस्थान के कुलपति संतोष अजमेरा के कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। छात्रों की मांगों में परिसर में हुई घटनाओं की जवाबदेही तय करना और कुलपति के इस्तीफे की मांग शामिल है।

प्रदर्शन के बीच छात्रों और प्रशासन के बीच मतभेद सामने आए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं, प्रशासन की ओर से शैक्षणिक गतिविधियों और परिसर की मौजूदा स्थिति को लेकर कदम उठाए गए हैं।

इस पूरे मामले ने फिल्म संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, प्रशासन की जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।

13 नवंबर तक स्थगित की गईं शैक्षणिक गतिविधियां

रिपोर्टों के अनुसार, SRFTI प्रशासन ने 16 अक्टूबर को जारी नोटिस में संबंधित विभागों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां 13 नवंबर तक स्थगित करने की जानकारी दी थी। छात्रों को परिसर खाली करने के लिए भी कहा गया था।

23 अक्टूबर की रिपोर्टों में बताया गया कि प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें घर ले जाने का अनुरोध किया। दूसरी ओर, छात्र प्रतिनिधियों ने इस कदम पर सवाल उठाए और इसे विरोध प्रदर्शन पर दबाव बनाने की कोशिश बताया।

शैक्षणिक गतिविधियों के स्थगित होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और संस्थान के सामान्य कामकाज पर असर पड़ने की चिंता भी सामने आई है।

Naseeruddin: पायल कपाड़िया ने भी छात्रों का समर्थन किया

फिल्म निर्माता पायल कपाड़िया ने भी SRFTI के प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने परिसर की घटनाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।

नसीरुद्दीन शाह और पायल कपाड़िया जैसे फिल्म जगत से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला संस्थान तक सीमित न रहकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

छात्रों के समर्थन में उठ रही आवाजों के बीच प्रशासन की भूमिका, परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य बनाने के सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

क्या है इस विवाद का राजनीतिक पहलू?

SRFTI का मामला अब छात्रों की सुरक्षा और संस्थान के प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ राजनीतिक बहस से भी जुड़ गया है। नसीरुद्दीन शाह ने अपने बयान में बीजेपी की आलोचना की है, जबकि छात्रों का विरोध मुख्य रूप से परिसर में हुई घटनाओं और प्रशासन की जवाबदेही पर केंद्रित है।

इस मामले में सभी पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। राजनीतिक आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित व्यक्ति के बयान के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

फिलहाल, SRFTI में प्रदर्शन, शैक्षणिक गतिविधियों का स्थगन और छात्रों की मांगें इस विवाद के प्रमुख पहलू हैं। आगे प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित पक्षों की बातचीत से मामले की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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