CM Yogi News: सीएम योगी ने किया LEXQ सेंटर का उद्घाटन, बोले- AI मददगार हो, निर्णायक नहीं
लखनऊ - उत्तर प्रदेश में आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के बंथरा स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित TechSangam अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ किया। यह केंद्र क्वांटम फॉरेंसिक और कानूनी अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित है।
इस पहल का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और कानून के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है, ताकि अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का प्रभावी इस्तेमाल हो सके और न्याय प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके।
AI मददगार बने, इंसान के फैसलों पर हावी नहीं हो: योगी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि AI लोगों की मदद कर सकता है, लेकिन उसे अंतिम निर्णय लेने वाला नहीं बनना चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, तकनीक का इस्तेमाल मानवीय विवेक और समझ के आधार पर होना चाहिए। यदि इंसान हर काम के लिए AI पर निर्भर होने लगेगा, तो यही तकनीक भविष्य में चुनौती भी बन सकती है।
आज शिक्षा, उद्योग, पुलिसिंग, न्याय व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना और उसके परिणामों की उचित जांच करना जरूरी है।
क्वांटम फॉरेंसिक से मजबूत हो सकती है जांच और न्याय प्रक्रिया
LEXQ सेंटर का एक प्रमुख उद्देश्य क्वांटम तकनीक, कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच सहयो ग को बढ़ावा देना है। फॉरेंसिक विज्ञान में वैज्ञानिक तरीकों की मदद से अपराध से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जाती है। इन साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियां मामलों को समझने और न्यायालय के सामने तथ्य प्रस्तुत करने में मदद हासिल करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था को विश्वसनीय बनाने के लिए कानून और विज्ञान का एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करना आवश्यक है। वैज्ञानिक साक्ष्य जटिल मामलों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस केंद्र के माध्यम से अल्पकालिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम, संयुक्त शोध, उद्योग आधारित नवाचार और नीतिगत सलाह जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। साथ ही, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, फॉरेंसिक विज्ञान सेवाओं और विधि विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
42 साल पुराने मामले का जिक्र कर समझाई वैज्ञानिक साक्ष्यों की अहमियत
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने एक पुराने आपराधिक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि न्याय मिलने में लंबा समय लगने से पीड़ितों और उनके परिवारों का व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने 1980 में हुए अपराध और उसके बाद चली लंबी कानूनी प्रक्रिया का जिक्र किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में कार्रवाई और कानूनी संघर्ष के बाद लगभग 42 वर्ष बाद सजा हो सकी।
इस उदाहरण के जरिए उन्होंने बताया कि अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी भी मामले में साक्ष्यों का मूल्यांकन और दोषसिद्धि का निर्णय कानून के अनुसार ही किया जाता है।
LEXQ: यूपी में 2030 तक 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत भी बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है।
इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर समूहों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस योजना से डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती देने, निवेश आकर्षित करने और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
डेटा सेंटर डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके माध्यम से ऑनलाइन सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियों को आधार मिलता है।
साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने ऑपरेशन त्रिनेत्र और आपातकालीन सेवा 112 जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में किया जा रहा है।
डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने के साथ साइबर अपराध भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
TechSangam सम्मेलन में AI, क्वांटम तकनीक, साइबर फॉरेंसिक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इन क्षेत्रों में अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए नई शैक्षणिक और रोजगार संबंधी संभावनाएं भी विकसित हो सकती हैं।
युवाओं के लिए शोध और तकनीकी प्रशिक्षण के नए अवसर
LEXQ सेंटर से जुड़े प्रस्तावित कार्यक्रमों में संयुक्त अनुसंधान, कौशल विकास और उद्योगों के साथ सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उभरती तकनीकों को समझने तथा उनके व्यावहारिक उपयोग पर काम करने का अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के विद्यार्थी अपनी वैज्ञानिक क्षमता और आधुनिक प्रयोगशालाओं की मदद से अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
यह भी पढ़ें - मध्य प्रदेश में कार्बाइड गन पर सख्ती, CM के निर्देश