महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया, ओमान से CBI ने कराया प्रत्यर्पण; 6000 करोड़ के सट्टा नेटवर्क में अब होंगे बड़े खुलासे?
Mahadev App Case: ऑनलाइन सट्टेबाजी के चर्चित महादेव ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी कामयाबी मिली है। ऐप के प्रमोटर और कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित करा लिया गया है। CBI ने दूसरी केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। सौरभ चंद्राकर पर भारत में बड़े पैमाने पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाने और उससे जुड़े कथित आर्थिक अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। अब उसे छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित CBI की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। उसकी भारत वापसी से महादेव ऐप मामले की जांच में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।
Mahadev: ओमान से कैसे भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर?
CBI के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से सौरभ चंद्राकर का ओमान से सफलतापूर्वक प्रत्यर्पण कराया गया है। उसे भारत लाने के लिए CBI की एक विशेष टीम ओमान भेजी गई थी। यह टीम सौरभ को अपने साथ लेकर भारत पहुंची।
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी था। इसी के आधार पर जून 2026 में ओमान के अधिकारियों ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
अब भारत आने के बाद उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाएगा। यहां जांच एजेंसियां अदालत से उसकी हिरासत मांग सकती हैं, ताकि महादेव ऐप के पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और दूसरे आरोपियों के बारे में पूछताछ की जा सके।
क्या है 6000 करोड़ रुपये का Mahadev ऐप घोटाला?
महादेव ऑनलाइन बुक ऐप भारत के चर्चित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और दूसरे खेलों के साथ विभिन्न गतिविधियों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।
आरोप है कि इस नेटवर्क का संचालन कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों के माध्यम से किया जाता था। इसमें अलग-अलग शहरों में सट्टेबाजी के पैनल बनाए गए थे। इनके जरिए लोगों को ऑनलाइन सट्टा लगाने के लिए आईडी उपलब्ध कराई जाती थी।
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को इस नेटवर्क का प्रमुख प्रमोटर बताया जाता है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों ने मिलकर इस कारोबार का विस्तार किया और भारत के बाहर से भी इसके संचालन में भूमिका निभाई।
इस मामले को करीब 6000 करोड़ रुपये के कथित सट्टेबाजी और वित्तीय अपराध नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह जांच से जुड़ा अनुमानित आंकड़ा है, इसे अदालत से साबित हुई रकम नहीं माना जाना चाहिए।
रवि उप्पल के साथ मिलकर खड़ा किया था सट्टेबाजी का साम्राज्य
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर ने रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क को खड़ा किया था।
बताया जाता है कि दोनों वर्ष 2019 के आसपास भारत छोड़कर दुबई चले गए थे। इसके बाद कथित तौर पर विदेश से इस नेटवर्क का संचालन जारी रहा।
महादेव ऐप से जुड़े मामले में जांच के दौरान कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों के नाम सामने आए। इनमें Tiger Exchange, Gold365 और Laser247 जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।
ED का आरोप है कि इस नेटवर्क में हजारों सट्टेबाजी पैनल काम कर रहे थे। इनके माध्यम से बड़ी मात्रा में पैसा जमा किया जाता था और फिर अलग-अलग खातों तथा कंपनियों के जरिए धन का लेनदेन किया जाता था।
दुबई में भी हुई थी गिरफ्तारी, लेकिन भारत नहीं आ पाया था सौरभ
सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की कोशिशें काफी समय से चल रही थीं। अक्टूबर 2024 में इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों ने उसे दुबई में हिरासत में लिया था।
भारत ने उस समय भी उसके प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया था। हालांकि, वह प्रक्रिया सफल नहीं हो पाई और सौरभ को भारत नहीं लाया जा सका।
इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उसके खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। जून 2026 में उसके ओमान पहुंचने और वहां हिरासत में लिए जाने के बाद प्रत्यर्पण की नई उम्मीद जगी।
अब ओमान से भारत लाए जाने के बाद इस मामले में जांच की दिशा और तेज होने की संभावना है।
ED और CBI की जांच में सामने आए कई बड़े नाम
महादेव ऐप मामले की जांच केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें कथित मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला के जरिए पैसे के लेनदेन और सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि देने जैसे आरोपों की भी जांच की जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI इस मामले में अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। जांच एजेंसियों ने कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।
9 जुलाई 2026 को जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, CBI ने महादेव ऐप से जुड़े दो मामलों में कुल 11 चार्जशीट दाखिल करने की जानकारी दी थी। इनमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं।
ED ने इस मामले में विदेशों में स्थित संपत्तियों और कथित अवैध कमाई से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की है। मार्च 2026 में एजेंसी ने सौरभ चंद्राकर से जुड़ी करीब 1,700 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अटैच करने की जानकारी दी थी।
रवि उप्पल कहां है? जांच एजेंसियों के सामने अब यह भी बड़ा सवाल
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब उसके कथित सहयोगी रवि उप्पल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रवि उप्पल को महादेव ऐप नेटवर्क का सह-संस्थापक और प्रमुख प्रमोटर बताया जाता है। वह भी इस मामले में जांच एजेंसियों की नजर में है।
रिपोर्टों के मुताबिक, रवि उप्पल नवंबर 2025 के आसपास UAE से गायब हो गया था। उसके संभावित ठिकाने को लेकर अलग-अलग खबरें सामने आई हैं।
अब जांच एजेंसियां सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के दौरान रवि उप्पल के ठिकाने, नेटवर्क के संचालन और विदेशों में मौजूद कथित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकती हैं।
अब आगे क्या होगा? रायपुर की अदालत में पेशी के बाद बढ़ेगी जांच
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद सबसे अहम चरण पूछताछ का होगा। CBI उससे महादेव ऐप के संचालन, पैसों के लेनदेन, दूसरे आरोपियों की भूमिका और विदेशों में फैले नेटवर्क को लेकर सवाल कर सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश करेंगी कि कथित तौर पर सट्टेबाजी से जुटाई गई रकम कहां भेजी जाती थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
हालांकि, आगे की कार्रवाई अदालत के आदेश और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल सौरभ चंद्राकर का ओमान से भारत प्रत्यर्पण महादेव ऐप मामले में एक बड़ी जांच संबंधी उपलब्धि माना जा रहा है। अब सबकी नजर रायपुर की विशेष अदालत में होने वाली पेशी और CBI की पूछताछ पर टिकी है।
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