Gold Silver Price Crash: सोना ₹3,200 और चांदी ₹4,200 हुई सस्ती, क्या अभी और गिरेगा भाव? जानें बड़ी वजह

Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट से निवेशकों और खरीदारों की चिंता बढ़ गई है। नवंबर की शुरुआत भी कीमती धातुओं के लिए अच्छी नहीं रही। 1 नवंबर 2026 को सामने आए बाजार आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत में 3,200 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं चांदी भी 4,200 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई। इस गिरावट के बाद सोने का भाव 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 1.86 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गया। अक्टूबर महीने में भी दोनों धातुओं में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों, महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है।

सोना और चांदी कितना हुआ सस्ता?

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,200 रुपये गिरकर 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। इससे पहले शुक्रवार को सोना 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। ये कीमतें सभी करों सहित हैं।

वहीं चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी 4,200 रुपये टूटकर 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव 1,90,200 रुपये प्रति किलो था।

इस गिरावट के बाद सोना और चांदी दोनों की कीमतें दिसंबर 2025 के आसपास के स्तर पर पहुंचती नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि अक्टूबर के दौरान भी इन धातुओं पर बिकवाली का दबाव बना रहा।

अक्टूबर में सोने और चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट आई?

अक्टूबर का महीना सोने और चांदी के लिए काफी कमजोर रहा। घरेलू बाजार में 30 सितंबर को सोने की कीमत 1,49,300 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो अब घटकर 1,42,000 रुपये रह गई है। यानी एक महीने में सोना 7,300 रुपये सस्ता हो चुका है।

चांदी की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब रही। 30 सितंबर को चांदी का भाव 2.32 लाख रुपये प्रति किलो था, जो अब गिरकर 1.86 लाख रुपये रह गया है। इस तरह अक्टूबर के दौरान चांदी में करीब 46,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।

लगातार हो रही इस बिकवाली ने निवेशकों को चौंका दिया है। खासकर उन लोगों की चिंता बढ़ी है जिन्होंने ऊंचे भाव पर सोने और चांदी में निवेश किया था।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें क्यों बन रही हैं गिरावट की वजह?

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता मानी जा रही है।

दरअसल, जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने या और बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशकों का रुझान सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों से कम हो सकता है। इसके बजाय वे बॉन्ड और अन्य ब्याज आधारित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं।

हाल के दिनों में अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों और मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है। इसके चलते सोने और चांदी पर दबाव बढ़ा है।

बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, यह अभी बाजार की आशंका है, फेड का घोषित फैसला नहीं।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाई चिंता

सोने और चांदी की कीमतों पर कच्चे तेल की कीमतों का भी असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है।

जब ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं तो परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत भी बढ़ सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने का दबाव बढ़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसका असर कीमती धातुओं की मांग और कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी Gold  -चांदी की कीमतें धड़ाम

घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं स्पॉट सिल्वर में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 49.12 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

सोने की कीमत एक साल से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि चांदी 50 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई।

विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने कीमती धातुओं की चमक फीकी कर दी है।

शेयर बाजार में गिरावट का भी सोने-चांदी पर असर

हाल के दिनों में टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट ने भी कीमती धातुओं की बिकवाली को बढ़ाया है। बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI कंपनियों के भारी निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शेयर बाजार में नुकसान होने पर कुछ निवेशक दूसरे बाजारों में अपनी संपत्तियां बेचकर नकदी जुटाते हैं। इस तरह की बिकवाली का दबाव सोने और चांदी पर भी पड़ सकता है।

चांदी की कीमतों में गिरावट ज्यादा तेज रहने की एक वजह इसकी औद्योगिक मांग भी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उद्योगों में चांदी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में औद्योगिक मांग कमजोर होने की आशंका से इसकी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।

नवंबर में Gold  -चांदी फिर महंगा होगा या गिरावट जारी रहेगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नवंबर में सोने और चांदी की कीमतों में दोबारा तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयान, महंगाई के आंकड़े, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी।

हालांकि, भारत में त्योहारी और शादी-ब्याह के मौसम के कारण सोने की मांग को सहारा मिल सकता है। इसके अलावा दुनिया के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद भी लंबी अवधि में कीमतों को समर्थन दे सकती है।

चांदी के मामले में औद्योगिक मांग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से मांग मजबूत रहती है तो चांदी को दोबारा सहारा मिल सकता है।

फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को केवल कीमतों में गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। सोने और चांदी में निवेश से पहले बाजार की स्थिति, अपनी जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है।

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