कानपुर / शुभम मिश्रा : कानपुर में लोगों की सेहत से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बिल्हौर क्षेत्र के दो कोल्ड स्टोरेज पर छापेमारी कर एक ऐसे गोरखधंधे का खुलासा किया है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने 5 हजार किलो से अधिक कृत्रिम रूप से लाल रंग में रंगे आलू बरामद किए। जांच में यह भी सामने आया कि आलू को आकर्षक दिखाने के लिए "सीमेंट कलर फॉर फ्लोर" जैसे औद्योगिक रंग का इस्तेमाल किया जा रहा था।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके से इस्तेमाल किया जा रहा रंग भी जब्त कर लिया है। रंगे हुए आलू और रासायनिक रंग के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
Kanpur News: सूचना मिली तो खाद्य विभाग ने मारी रेड
खाद्य सुरक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बिल्हौर क्षेत्र के कुछ कोल्ड स्टोरेज में सामान्य आलू को लाल रंग देकर महंगे लाल आलू के रूप में बाजार में बेचा जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने विशेष टीम गठित कर दोनों कोल्ड स्टोरेज पर एक साथ छापेमारी की।
टीम जब मौके पर पहुंची तो कर्मचारियों को आलू पर कृत्रिम लाल रंग चढ़ाते हुए देखा गया। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि इस्तेमाल किया जा रहा रंग खाद्य पदार्थों के लिए स्वीकृत नहीं था, बल्कि फर्श और निर्माण कार्य में उपयोग होने वाला सीमेंट कलर था।
सीमेंट कलर से रंगे जा रहे थे आलू
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आलू को लाल और चमकदार बनाने के लिए जिस रंग का उपयोग किया जा रहा था, वह "सीमेंट कलर फॉर फ्लोर" था। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे औद्योगिक रंगों का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है और यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ऐसे रसायनों के लगातार सेवन से शरीर पर लंबे समय में गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। यही वजह है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
5 हजार किलो से अधिक आलू जब्त, लाखों का माल सीज
छापेमारी के दौरान विभाग ने करीब 5 हजार किलो से अधिक रंगे हुए आलू जब्त किए। अधिकारियों के मुताबिक जब्त किए गए आलू की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 30 हजार रुपये है।
इसके अलावा टीम ने मौके से इस्तेमाल किया जा रहा रंग भी बरामद किया। जांच के लिए चार नमूने सील कर प्रयोगशाला भेजे गए हैं, जिनमें रंगे हुए आलू और रासायनिक पदार्थ दोनों शामिल हैं।
रिपोर्ट के बाद होगी कानूनी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
जिलाधिकारी ने क्या कहा?
कानपुर नगर के जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज की जाएगी और दोषियों को नियमों के अनुसार दंडित किया जाएगा।
ऐसे मिलावटी आलू से कैसे रहें सतर्क?
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सब्जियां खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि आलू का रंग असामान्य रूप से अधिक चमकदार या एक जैसा दिखाई दे तो उसकी जांच कर लेनी चाहिए। शक होने पर ऐसे उत्पादों की सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जा सकती है।
बाजार से सब्जियां खरीदने के बाद उन्हें अच्छी तरह पानी से धोना भी जरूरी है, हालांकि औद्योगिक रंगों के इस्तेमाल की स्थिति में केवल धोना पर्याप्त नहीं माना जाता।
क्यों अहम है यह मामला?
Kanpur News का यह मामला सिर्फ मिलावट का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले आलू को कृत्रिम रंग देकर बाजार में बेचना हजारों उपभोक्ताओं की सेहत को खतरे में डाल सकता है। ऐसे मामलों पर प्रशासन की कार्रवाई यह संदेश देती है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त निगरानी रखी जा रही है।
अब सभी की नजर प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर यह तय होगा कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा उनके खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है।