अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना कम है।
उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा का सवाल स्वाभाविक रूप से उठेगा। फिलहाल तेल विपणन कंपनियां पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल का उपयोग और प्रसंस्करण कर रही हैं।
अभी क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, तेल कंपनियां अपनी जरूरत का कच्चा तेल आमतौर पर करीब दो महीने पहले खरीदती हैं। वर्तमान में जिन रिफाइनरियों में तेल का प्रसंस्करण हो रहा है, उसका बड़ा हिस्सा अप्रैल और मई के दौरान खरीदा गया था, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा था।
ऐसे में मौजूदा समय में वैश्विक कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर खुदरा ईंधन कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता। यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार कम बनी रहती हैं, तभी इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।
सरकार बाजार की स्थिति पर रख रही नजर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनके अनुसार, किसी भी मूल्य संशोधन का निर्णय अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय बाजार में कीमतों की स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि आने वाले कुछ सप्ताह तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो ईंधन दरों में कटौती पर विचार किया जा सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर सरकार का फोकस
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों का उपयोग भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने देश में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मंत्री के अनुसार, वर्तमान में भारत के पास बंदरगाहों, रिफाइनरियों, टर्मिनलों और रणनीतिक भंडारण केंद्रों में इतना तेल उपलब्ध है कि लगभग 76 से 80 दिनों की जरूरत पूरी की जा सकती है। हालांकि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इस क्षमता को और बढ़ाने की आवश्यकता है।
सरकार ने पुराने फैसलों का भी किया जिक्र
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में कई बार पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती की है।
उनके अनुसार, इन फैसलों के कारण सरकार ने प्रति लीटर करीब 10 रुपये का वित्तीय भार स्वयं वहन किया। उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक संकटों के बावजूद भारत में ईंधन कीमतों में वृद्धि कई अन्य देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संकेत?
केंद्रीय मंत्री के बयान से साफ है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत की संभावना कम है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक लगातार नरम बनी रहती हैं, तो भविष्य में ईंधन कीमतों की समीक्षा की जा सकती है।
फिलहाल सरकार का जोर उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने पर है।