असम आओ, बांग्लादेश भेज दूंगा', राहुल गांधी को Himanta Sarma की दो टूक; घुसपैठ और SIR पर छिड़ी सियासी जंग

Himanta Biswa Sarma Rahul Gandhi News: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। बांग्लादेश और घुसपैठ के मुद्दे को लेकर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हिमंत सरमा ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर उन्हें बांग्लादेश जाना है तो इसकी व्यवस्था वह और पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी मिलकर कर देंगे। उनके इस बयान को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच टकराव चल रहा है।

राहुल गांधी पर हिमंत सरमा का तीखा हमला

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 1 नवंबर को राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बांग्लादेश का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बांग्लादेश जाना चाहते हैं तो इसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी वह और सुवेंदु अधिकारी मिलकर उठा लेंगे।

सरमा ने इस टिप्पणी के जरिए कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीतिक नीतियों पर सवाल उठाने की कोशिश की। भाजपा नेताओं की ओर से कांग्रेस पर अक्सर बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया जाता रहा है।

हालांकि, राहुल गांधी की ओर से बांग्लादेश जाने की किसी योजना की पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर सामने आई है।

सुवेंदु अधिकारी को भी किया टैग

हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को भी शामिल किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बांग्लादेश जाने की व्यवस्था दोनों नेता मिलकर कर सकते हैं।

इस टिप्पणी के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। असम और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है। ऐसे में घुसपैठ और सीमा सुरक्षा का मुद्दा दोनों राज्यों की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है।

भाजपा नेता इन मुद्दों को उठाकर कांग्रेस पर निशाना साधते रहे हैं। सरमा की ताजा टिप्पणी को भी इसी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

SIR को लेकर भी राहुल गांधी पर बरसे Himanta सरमा

राहुल गांधी पर हमला सिर्फ बांग्लादेश वाले बयान तक सीमित नहीं रहा। हिमंत सरमा ने रविवार को शिमला में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा का नेतृत्व करते हुए SIR के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इस प्रक्रिया में कथित घुसपैठियों के नाम हटाए जा रहे हैं।

सरमा ने कहा कि असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अवैध घुसपैठ का मुद्दा गंभीर है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची को साफ-सुथरा रखने के लिए SIR जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपनी सुविधा के अनुसार चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं पर सवाल उठाती है।

उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि अगर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उन्हें आपत्ति है तो फिर उसी प्रक्रिया से चुने जाने के बाद लोकसभा में अपनी सदस्यता पर सवाल क्यों नहीं उठाते।

क्या है SIR, जिस पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की व्यापक जांच और अपडेट करता है।

इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत मतदाताओं के नाम हटाने और गलत प्रविष्टियों को सुधारने जैसे काम किए जाते हैं।

भाजपा का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची में मौजूद गलतियों और कथित अवैध मतदाताओं की पहचान करने में मदद मिलेगी।

वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कुछ जगहों पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई है। विपक्ष का कहना है कि SIR की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

इसी मुद्दे को लेकर भाजपा और INDIA ब्लॉक के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है।

राहुल गांधी और कांग्रेस पर 1984 के सिख दंगों को लेकर भी साधा निशाना

हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं पर 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी हमला बोला।

उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन सिख समुदाय के लिए बेहद दर्दनाक ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है। ऐसे दिन दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की महारैली आयोजित करने पर उन्होंने सवाल उठाए।

सरमा ने राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से सिख समुदाय से माफी मांगने और मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखने की अपील की।

उन्होंने 1984 की हिंसा में कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। सरमा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को इस घटना के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में हजारों लोगों की जान गई थी।

भाजपा और INDIA ब्लॉक के बीच बढ़ी राजनीतिक तल्खी

1 नवंबर को देश की राजनीति में भाजपा और विपक्षी गठबंधन के बीच कई मुद्दों पर आमने-सामने की स्थिति देखने को मिली। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक ने SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर महारैली आयोजित की।

इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन के कई अन्य नेता शामिल हुए।

दूसरी ओर भाजपा ने भी 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' के नाम से अलग-अलग जगहों पर पदयात्राएं और कार्यक्रम आयोजित किए।

हिमंत बिस्वा सरमा ने शिमला में भाजपा की पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए।

Himanta ; बांग्लादेश और घुसपैठ का मुद्दा क्यों बना राजनीतिक बहस?

असम में बांग्लादेश से अवैध प्रवासन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। राज्य की बांग्लादेश से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण यह मुद्दा चुनावी राजनीति में भी अहम स्थान रखता है।

असम समझौता 1985 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC को लेकर राज्य में लंबे समय से चर्चा होती रही है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की बात करते रहे हैं। वहीं कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में कानून और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

फिलहाल राहुल गांधी और हिमंत सरमा के बीच बयानों की यह जंग राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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