Commonwealth Games 2026 : स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत गुरुवार, 23 जुलाई से हो गई है। भारत इस बार 125 खिलाड़ियों के दल के साथ पदकों की चुनौती पेश करेगा। खेलों की संख्या पहले की तुलना में कम होने के बावजूद भारतीय टीम से एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग और जूडो में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। खास तौर पर नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहैन जैसे स्टार खिलाड़ियों पर सभी की नजरें रहेंगी।

हालांकि, इस बार कई ऐसे खेल कार्यक्रम से बाहर हैं जिनमें भारत पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा पदक जीतता रहा है। ऐसे में भारतीय दल के लिए पिछली बार जैसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा।

Commonwealth Games 2026 में भारत का दल कितना बड़ा है?

भारत ने इस बार कुल 125 खिलाड़ियों को उतारा है, जिनमें 77 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। ये खिलाड़ी आठ सामान्य (Able-bodied) और पांच पैरा स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे।

पूरे भारतीय दल में कुल 190 सदस्य हैं। इनमें 125 खिलाड़ी, 51 कोच एवं सपोर्ट स्टाफ और 14 अधिकारी शामिल हैं।

एथलेटिक्स में भारत के सबसे अधिक 32 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा मुक्केबाजी और जूडो में 14-14, वेटलिफ्टिंग में 12 और तैराकी में पांच खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

उद्घाटन समारोह में किसे मिली बड़ी जिम्मेदारी?

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू भारतीय दल की ध्वजवाहक (Flag Bearer) होंगी। वहीं टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन मुक्केबाज लवलीना बोरगोहैन उद्घाटन समारोह में बैटन बेयरर की भूमिका निभाएंगी।

इस बार भारत के सामने क्यों है बड़ी चुनौती?

बर्मिंघम 2022 में भारत ने 210 खिलाड़ियों का दल भेजा था और 61 पदक, जिनमें 22 स्वर्ण पदक शामिल थे, जीते थे। लेकिन इस बार प्रतियोगिता का प्रारूप छोटा कर दिया गया है।

खेल स्वर्ण पदक रजत पदक कांस्य पदक कुल पदक
रेसलिंग 6 1 5 12
वेटलिफ्टिंग 3 3 4 10
एथलेटिक्स 1 4 3 8
बॉक्सिंग 3 1 3 7
बैडमिंटन 3 1 2 6
टेबल टेनिस 3 1 1 5
जूडो 0 2 1 3
लॉन बाउल्स 1 1 0 2
स्क्वैश 0 0 2 2
हॉकी 0 1 1 2
पैरा टेबल टेनिस 1 0 1 2
पैरा पावरलिफ्टिंग 1 0 0 1
क्रिकेट 0 1 0 1
कुल 22 16 23 61

जहां पिछले संस्करण में 19 खेल शामिल थे, वहीं इस बार केवल 10 खेलों में मुकाबले होंगे। इससे भारत की पदक संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

कौन से खेल इस बार कार्यक्रम से बाहर हैं?

इस संस्करण में शूटिंग, कुश्ती, हॉकी, टेबल टेनिस, स्क्वैश और महिला क्रिकेट को कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है।

बर्मिंघम 2022 में भारत ने इन्हीं छह खेलों में 30 पदक जीते थे। इसलिए इन खेलों के बाहर होने से भारतीय दल के लिए पदक तालिका में पिछला प्रदर्शन दोहराना अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

किन खिलाड़ियों से हैं सबसे ज्यादा उम्मीदें?

भारत की सबसे बड़ी उम्मीद ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा हैं। चोट के कारण वह बर्मिंघम 2022 में हिस्सा नहीं ले पाए थे, लेकिन इस बार उनकी वापसी हुई है। जेवलिन थ्रो में उनका मुकाबला पाकिस्तान के अरशद नदीम और श्रीलंका के रुमेश पथिराजे जैसे मजबूत खिलाड़ियों से होगा।

एथलेटिक्स में मुरली श्रीशंकर, सर्वेश कुशारे, गुरिंदरवीर सिंह, अनिमेष कुजूर, पारुल चौधरी, तजिंदरपाल सिंह तूर और गुलवीर सिंह भी भारत की पदक उम्मीदों में शामिल हैं।

वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग में भी मजबूत दावेदारी

वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतने के इरादे से उतरेंगी। वहीं मुक्केबाजी में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहैन, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार और जैसमीन लम्बोरिया पर टिकी रहेंगी।

भारतीय दल के सबसे अनुभवी खिलाड़ी 49 वर्षीय लॉन बॉल खिलाड़ी दिनेश कुमार सिंह हैं, जबकि 16 वर्षीय पैरा साइकिलिस्ट लीशा दास सबसे युवा खिलाड़ी हैं।

अहमदाबाद 2030 के लिहाज से भी अहम हैं ये खेल

साल 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी अहमदाबाद करेगा। ऐसे में ग्लासगो संस्करण भारत के लिए सिर्फ पदक जीतने का मंच नहीं, बल्कि भविष्य के आयोजन और खिलाड़ियों की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों बदला गया कॉमनवेल्थ गेम्स का प्रारूप?

मूल रूप से इन खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को मिली थी, लेकिन बढ़ती लागत का हवाला देते हुए उसने आयोजन से अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद ग्लासगो ने सीमित संसाधनों के साथ मेजबानी स्वीकार की।

आयोजकों ने खर्च कम रखने के लिए प्रतियोगिता को 10 खेलों और चार प्रमुख स्थलों तक सीमित किया है। इसी वजह से कई पारंपरिक खेल इस बार कार्यक्रम से बाहर कर दिए गए हैं।

भारत के लिए यह संस्करण चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन टीम में मौजूद अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलन उम्मीद जगाता है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि भारतीय खिलाड़ी सीमित स्पर्धाओं में कितने पदक अपने नाम कर पाते हैं।