भारत और ईरान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं। ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत बनाने के साथ-साथ भविष्य के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।

गुरुग्राम में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई इस मुलाकात को भारत-ईरान ऊर्जा संबंध (India-Iran Energy Relations) के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।

तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के मौजूदा ढांचे की समीक्षा की और भविष्य में साझेदारी बढ़ाने के विकल्पों पर विचार किया।

चर्चा के दौरान तेल और गैस क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

तेहरान और नई दिल्ली के बीच संबंधों को मिलेगी मजबूती

भारत में ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों मंत्रियों ने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक में तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऊर्जा संबंधों को नई गति देने और संभावित सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत आने वाले समय में दोनों देशों के ऊर्जा संबंधों को और मजबूती प्रदान कर सकती है।

2019 के बाद बदला था ऊर्जा व्यापार का समीकरण

भारत-ईरान ऊर्जा संबंध (India-Iran Energy Relations) कभी काफी मजबूत माने जाते थे। भारत लंबे समय तक ईरानी कच्चे तेल के प्रमुख आयातकों में शामिल रहा है।

हालांकि, वर्ष 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के ऊर्जा व्यापार में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली।

अब हालिया बातचीत को दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ब्रिक्स मंच पर ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष फोकस

गुरुग्राम में 25 और 26 जून को आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और वैश्विक ऊर्जा सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख एजेंडा में शामिल हैं।

ब्रिक्स समूह में भारत, ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं। यह मंच वैश्विक ऊर्जा नीतियों और सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

हरदीप सिंह पुरी ने क्या कहा?

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उनकी ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद के साथ सार्थक चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों का आकलन किया। भारत संवाद, साझेदारी और पारस्परिक लाभ पर आधारित सहयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भविष्य में बढ़ सकते हैं सहयोग के अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बदलते हालात के बीच भारत और ईरान दोनों के लिए ऊर्जा सहयोग के नए अवसर तलाशना महत्वपूर्ण है। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि ईरान अपने ऊर्जा निर्यात के नए विकल्पों की तलाश में है।

ऐसे में भारत-ईरान ऊर्जा संबंध (India-Iran Energy Relations) को लेकर हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खोल सकती है।