कानपुर : लखनऊ में हाल ही में सामने आए कोचिंग संस्थान से जुड़े हादसे के बाद उत्तर प्रदेश में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। इसी कड़ी में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब काकादेव में व्यापक जांच अभियान चलाते हुए बड़ा कदम उठाया है। जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद शहर के शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है। छात्रों और अभिभावकों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

काकादेव में चला विशेष जांच अभियान

सोमवार को केडीए की टीम ने काकादेव क्षेत्र के कई प्रमुख कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान भवन निर्माण नियमों, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी मानकों की जांच की गई।

अधिकारियों के मुताबिक कई संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जहां नियमों का पालन नहीं पाया गया, वहां पहले छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उसके बाद संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की गई।

क्यों शुरू हुआ यह अभियान?

प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि यह विशेष अभियान छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शुरू किया गया है। हाल ही में लखनऊ में हुए हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और भवन संबंधी नियमों की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

इसी के तहत कानपुर में भी बड़े पैमाने पर जांच शुरू की गई है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर छात्रों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जाएगा।

किन संस्थानों पर हुई कार्रवाई?

कानपुर कोचिंग सील (Kanpur Coaching Seal) अभियान के तहत जिन संस्थानों पर कार्रवाई की गई, उनमें फिजिक्स वाला (Physics Wallah), वर्कस्पेस, महेंद्राज और केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर जैसे चर्चित कोचिंग संस्थान भी शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान केडीए के कई अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में अन्य संस्थानों की भी जांच की जाएगी।

किन नियमों की हो रही जांच?

प्राधिकरण के अनुसार जिन कोचिंग संस्थानों में भवन स्वीकृति, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास, पार्किंग और अन्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि सभी संस्थानों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा, ताकि छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

कार्रवाई के बाद उठे सवाल

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि शहर में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान वर्षों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच पहले क्यों नहीं की गई।

लोगों का आरोप है कि अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता है और कुछ समय तक अभियान चलाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

छात्रों की सुरक्षा पर नहीं होगा समझौता

कानपुर कोचिंग सील (Kanpur Coaching Seal) अभियान को लेकर प्रशासन का रुख साफ है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा कितना बढ़ता है और क्या अन्य कोचिंग संस्थानों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिलेगी।