भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर देश-दुनिया के बौद्ध अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन केंद्र है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इसके बावजूद कुशीनगर को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग अब भी पूरी नहीं हुई है।
रेल कनेक्टिविटी का यह मुद्दा एक बार फिर रेलवे की बैठक में उठा है। ZRUCC की 112वीं बैठक में सदस्य अशोक कुमार मिश्र ने गोरखपुर-कुशीनगर नई रेल लाइन परियोजना को दोबारा शुरू करने की मांग रखी। इसके साथ ही तरयासुजान रेलवे स्टेशन पर कुछ ट्रेनों के ठहराव और स्थानीय यात्रियों के लिए आरक्षण सुविधा को आसान बनाने का मुद्दा भी उठाया गया।
गोरखपुर-कुशीनगर रेल लाइन फिर शुरू करने की मांग
बैठक में अशोक कुमार मिश्र ने गोरखपुर से कुशीनगर को जोड़ने वाली नई रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाने की मांग की। बैठक में बताया गया कि परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी थी, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया।
ऐसे में अब मांग उठ रही है कि परियोजना को दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएं। कुशीनगर के लिए सीधी रेल सेवा शुरू होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवागमन आसान हो सकता है।
कुशीनगर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बेहतर रेल कनेक्टिविटी को स्थानीय कारोबार और रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तरयासुजान स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग
ZRUCC की बैठक में तरयासुजान रेलवे स्टेशन से जुड़ी मांग भी रखी गई। सदस्य ने ट्रेन संख्या 15113 और 15114 के तरयासुजान स्टेशन पर ठहराव की मांग की।
दावा है कि आसपास के कई गांवों के यात्रियों को इन ट्रेनों के ठहराव नहीं होने के कारण परेशानी होती है। स्थानीय स्तर पर यात्रियों की मांग है कि क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए इन ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए।
आरक्षित टिकट की सुविधा आसान बनाने की मांग
बैठक में तमकुहीराज, पडरौना और दुदही क्षेत्र के यात्रियों के लिए VIP कोटे से आरक्षित टिकट की सुविधा को भी आसान बनाने की मांग की गई।
इसके लिए स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था करने या संबंधित कार्यालय की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी करने का सुझाव दिया गया। मकसद यह है कि यात्रियों को आरक्षित टिकट के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर
कुशीनगर की अंतरराष्ट्रीय पहचान को देखते हुए रेल कनेक्टिविटी की मांग केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है। सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ने पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का विकल्प बढ़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर बेहतर कनेक्टिविटी का असर होटल, परिवहन, छोटे कारोबार और पर्यटन से जुड़े दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।