लखनऊ: उत्तर प्रदेश को बेहतर सड़क संपर्क, शिक्षा और निवेश के क्षेत्र में नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार के अनुसार, इन फैसलों का मकसद प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, युवाओं को प्रोत्साहन देना और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना है।
बैठक में विंध्य क्षेत्र के लिए नई सड़क परियोजनाओं, मेधावी छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना, भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध को बढ़ावा देने और प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़ने जैसे कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी।
CM Yogi Adityanath: विंध्य क्षेत्र को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
सरकार ने विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक और विंध्य एक्सप्रेसवे के विस्तार को मंजूरी दी है। सरकारी जानकारी के अनुसार, विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक परियोजना की अनुमानित लागत 29,039 करोड़ रुपये और विंध्य एक्सप्रेसवे के विस्तार पर 26,315 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दोनों परियोजनाओं को 6 लेन से भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित करने की योजना है।
सरकार का कहना है कि इससे गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, प्रयागराज, भदोही और सोनभद्र जैसे जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से मेधावी छात्राओं को मिलेगा लाभ
कैबिनेट ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को भी मंजूरी दी है। सरकार के अनुसार, स्नातक परीक्षा में शीर्ष 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर स्कूटी दी जाएगी।
इस योजना का लाभ राज्य विश्वविद्यालयों, उनसे संबद्ध सरकारी, सहायता प्राप्त, स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालयों की पात्र छात्राओं को मिलेगा। सरकार ने बताया कि स्कूटी के साथ रजिस्ट्रेशन, बीमा, हेलमेट और अन्य आवश्यक एसेसरीज भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सभी खरीद GeM पोर्टल के माध्यम से की जाएगी ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगा शोध, बनेगी नई शोधपीठ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप राज्य सरकार ने 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ' स्थापित करने का फैसला भी लिया है।
सरकार के अनुसार, यह शोधपीठ राज्य विश्वविद्यालयों और ऐसे महाविद्यालयों में स्थापित की जाएगी, जिन्होंने 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और जहां 5,000 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रत्येक शोधपीठ को अधिकतम 2 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया जाएगा और इसे प्रारंभिक रूप से पांच वर्ष के लिए स्थापित किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य भारतीय आचार्यों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और चिंतकों के योगदान पर अकादमिक शोध को बढ़ावा देना है।
एक-दूसरे से जुड़ेंगे यूपी के प्रमुख एक्सप्रेसवे
प्रदेश में तेज और सुगम सड़क नेटवर्क तैयार करने की दिशा में सरकार ने दो नए लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए डेवलपर चयन संबंधी RFP (Request for Proposal) को मंजूरी दी है।
पहली परियोजना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी। इसकी लंबाई लगभग 50.98 किलोमीटर होगी और अनुमानित लागत 24,775.84 करोड़ रुपये बताई गई है।
दूसरी परियोजना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी। इसकी लंबाई 90.838 किलोमीटर होगी और इस पर लगभग 7,488.74 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सरकार के अनुसार, दोनों ग्रीनफील्ड परियोजनाएं 6 लेन की होंगी, जिन्हें भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इनका निर्माण EPC मॉडल पर किया जाएगा।
विकास और निवेश को गति देने पर सरकार का फोकस
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रदेश में सड़क संपर्क बेहतर होगा, औद्योगिक निवेश को नई गति मिलेगी और शिक्षा के क्षेत्र में भी नई पहल देखने को मिलेगी। साथ ही युवाओं और छात्राओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं के जरिए सामाजिक और आर्थिक विकास को मजबूती देने का प्रयास किया जाएगा।
आने वाले समय में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इनके वास्तविक प्रभाव पर नजर रहेगी। फिलहाल सरकार का दावा है कि ये फैसले उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की दिशा में अहम कदम साबित होंगे।