मुंबई डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में जारी सियासी उठापटक के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी के भीतर लगातार सामने आ रही चुनौतियों और विरोधियों के हमलों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिया है कि उनके लिए पद से ज्यादा संगठन और शिवसैनिकों की भावना अहम है।

शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर शिवसैनिकों और पार्टी नेताओं को कभी ऐसा लगे कि कोई दूसरा व्यक्ति संगठन का नेतृत्व बेहतर तरीके से कर सकता है, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता या पद से उन्हें कोई मोह नहीं है और संगठन का हित हमेशा सर्वोपरि रहेगा।

शिवसैनिकों की इच्छा सर्वोपरि, पद छोड़ने को तैयार

अपने संबोधन के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि जिस दिन पार्टी कार्यकर्ताओं को लगेगा कि वे इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, उसी दिन वह पद छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई योग्य और सक्षम चेहरा सामने आता है तो वह उसे शिवसेना की कमान सौंपने में एक पल की भी देरी नहीं करेंगे।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह संघर्ष से पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। पार्टी को बचाने और उसकी विचारधारा को मजबूत बनाए रखने के लिए वह आखिरी दम तक लड़ाई लड़ते रहेंगे।

बगावत और विरोधियों पर साधा निशाना

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने अपने विरोधियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह मानकर चल रहे हैं कि लगातार संकटों के कारण उनका मनोबल टूट जाएगा, लेकिन ऐसा कभी नहीं होने वाला।

उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) ने हमेशा यह सिखाया था कि जो लोग संगठन और विचारधारा से गद्दारी करें, उन्हें लोकतांत्रिक और राजनीतिक तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ वह आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।

कांग्रेस गठबंधन पर बीजेपी को दिया जवाब

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी उद्धव ठाकरे ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिवसेना करीब तीन दशक तक भाजपा के साथ गठबंधन में रही, लेकिन इसके बावजूद पार्टी की अलग पहचान और विचारधारा कायम रही।

उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने से शिवसेना के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं है। इसके उलट उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा खुद अपने सहयोगी एकनाथ शिंदे गुट की गतिविधियों के कारण असहज स्थिति का सामना कर रही है।

'मातोश्री' के सम्मान का भी किया जिक्र

उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कांग्रेस के साथ पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद कांग्रेस ने कभी ठाकरे परिवार के निवास स्थान 'मातोश्री' के सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने लंबे समय तक शिवसेना के समर्थन का लाभ उठाया और बाद में उसी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की। उनके अनुसार राजनीति में विश्वास और वादों का पालन भी महत्वपूर्ण होता है।

चुनावी नतीजों से तय होगी असली ताकत

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण के अंत में कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक ताकत का फैसला चुनावी नतीजे करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ही अंतिम निर्णायक होती है और उनकी पार्टी जनता के बीच जाकर अपनी ताकत साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने भरोसा जताया कि शिवसैनिकों का समर्थन और जनता का विश्वास उनके साथ है और आने वाले समय में इसका असर चुनावी मैदान में भी दिखाई देगा।