Commonwealth Games 2026 : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाली अस्मिता डे ने कहा है कि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन से देश में जूडो को नई पहचान मिलेगी और अधिक बच्चे इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद सोमवार रात दिल्ली लौटने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में अस्मिता ने भारतीय जूडो दल की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि पहली बार भारत ने जूडो में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता है। उनके अनुसार यह भारतीय जूडो के लिए बड़ा क्षण है।

भारत ने जूडो में रचा इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में कुल चार पदक जीते। अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा हर्ष सिंह ने स्वर्ण, यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या चार तक पहुंचाई।

अस्मिता ने कहा कि इस प्रदर्शन के बाद देश में जूडो को अधिक पहचान मिलेगी और वह चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा बच्चे इस खेल में हिस्सा लें।

Golden Score में जीता यादगार फाइनल

महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे का मुकाबला कनाडा की हाइडी क्वाच से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और निर्धारित समय तक दोनों खिलाड़ियों के बीच बराबरी रही, जिसके बाद फैसला Golden Score में हुआ।

अतिरिक्त समय में अस्मिता ने शानदार थ्रो लगाकर निर्णायक Yuko हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में उन्होंने दबाव के बीच संयम बनाए रखा और वापसी करते हुए जीत दर्ज की।

1-0 से पिछड़ने के बाद भी नहीं छोड़ी उम्मीद

फाइनल मुकाबले के दौरान कनाडाई खिलाड़ी ने पहले बढ़त बनाई थी, लेकिन अस्मिता ने मुकाबले में वापसी करते हुए स्कोर बराबर किया। इसके बाद उन्होंने लगातार आक्रामक खेल दिखाया और अतिरिक्त समय में जीत हासिल कर ली।

अपनी वापसी को याद करते हुए अस्मिता ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही गोल्ड मेडल जीतने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी विश्वास ने उन्हें अंत तक लड़ने की ताकत दी।

उन्होंने कहा, "मैंने तय कर लिया था कि मुझे सिर्फ गोल्ड जीतना है, इसलिए मैंने अंत तक पूरी कोशिश की और जीत हासिल की।"

भारतीय जूडो के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का जूडो में प्रदर्शन अब तक के सबसे सफल अभियानों में गिना जा रहा है। दो स्वर्ण सहित कुल चार पदक जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

अस्मिता डे का मानना है कि इस उपलब्धि से देश में जूडो को नई पहचान मिलेगी और आने वाले समय में अधिक युवा खिलाड़ी इस खेल को करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित होंगे।