महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया संविधान और कानून के दायरे में रहकर पूरी की गई है।

उन्होंने दावा किया कि पार्टी को पूरा भरोसा है कि सांसदों के शामिल होने में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और इस मामले में उनकी स्थिति पूरी तरह मजबूत है।

शिकायत करना विपक्ष का अधिकार

आईएएनएस से बातचीत के दौरान संजय निरुपम ने कहा कि मुख्यमंत्री Eknath Shinde पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी का कोई भी राजनीतिक अभियान अधूरा नहीं रहता।

उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के जो छह सांसद शिंदे गुट के साथ आए हैं, उनका फैसला पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है। यदि शेष सांसद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं, तो यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे कानूनी स्थिति प्रभावित नहीं होगी।

कांग्रेस पर साधा निशाना

संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने इस दौरान कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस जनता को भ्रमित करने और राजनीतिक दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने भाजपा पर संविधान बदलने की मंशा रखने का आरोप लगाया था। हालांकि, सरकार के दो वर्ष पूरे होने के बाद भी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है।

संविधान पर दिया बयान

निरुपम ने कहा कि संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और इसे समाप्त करने जैसी बातें केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर संविधान में संशोधन होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और अतीत में कांग्रेस सरकारों के दौरान भी कई संशोधन किए गए थे।

आरक्षण को लेकर कांग्रेस के आरोपों को बताया गलत

आरक्षण के मुद्दे पर भी संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण खत्म करने के बजाय सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों को अधिक अवसर देने की दिशा में काम कर रही है।

उनके मुताबिक, परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की बात शामिल थी। इसलिए आरक्षण समाप्त करने के आरोप निराधार हैं।

डिंडोशी हथियार बरामदगी मामले पर जताई चिंता

मुंबई के डिंडोशी इलाके में एक टेम्पो से कथित रूप से धारदार हथियार मिलने के मामले पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की।

निरुपम ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इसके पीछे हिंसा या अशांति फैलाने की कोई साजिश है, तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कश्मीरी पंडितों की वापसी पर क्या बोले?

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के मुद्दे पर बोलते हुए संजय निरुपम ने कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है।

उन्होंने कहा कि वर्षों पहले घाटी से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करना जरूरी है। उनके अनुसार, अनुच्छेद 370 हटने के बाद सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है और धीरे-धीरे पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

निरुपम ने जोर देकर कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विस्थापित परिवारों को सभी जरूरी सुविधाएं मिलें और उनके साथ भविष्य में किसी प्रकार का अन्याय न हो।

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की खबरों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दलों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का रुख क्या रहता है।

फिलहाल संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) के बयान ने साफ कर दिया है कि शिंदे गुट इस पूरे घटनाक्रम को पूरी तरह कानूनी और संवैधानिक मान रहा है, जबकि विपक्ष इसे लेकर अपने स्तर पर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी में है।