कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा चढ़ने लगा है। इसी बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने बहरामपुर विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। निर्वाचन आयोग को दिए गए उनके आधिकारिक हलफनामे (Affidavit) ने सबकी नजरें अपनी ओर खींच ली हैं, जिसमें उनकी करोड़ों की संपत्ति और उन पर दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों का पूरा विवरण दिया गया है।

2024 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद, कांग्रेस ने एक बार फिर अपने इस कद्दावर नेता पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य की चुनावी जंग में उतारा है। हलफनामे के अनुसार, अधीर रंजन चौधरी के पास नकदी के रूप में मात्र 94,500 रुपये हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास 7,25,000 रुपये कैश मौजूद है।

बैंक बैलेंस और लग्जरी गाड़ियों का विवरण

अधीर रंजन चौधरी के विभिन्न बैंक खातों की बात करें तो पार्लियामेंट हाउस दिल्ली स्थित ब्रांच में उनके 6,18,769 रुपये जमा हैं, जबकि अन्य खातों को मिलाकर कुल बैंक बैलेंस लगभग 6.42 लाख रुपये बैठता है। हालांकि, संपत्तियों के मामले में वे काफी समृद्ध हैं। उनके पास 22 लाख रुपये की कीमत की गाड़ियां और 27 लाख रुपये से अधिक की ज्वेलरी है।

हलफनामे के अनुसार, अधीर रंजन चौधरी के पास कुल 48 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति है। वहीं उनकी पत्नी के नाम पर भी 6 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति दर्ज की गई है।

पांच एफआईआर और गंभीर आपराधिक आरोप

अधीर रंजन चौधरी के राजनीतिक करियर के साथ-साथ उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों का ब्यौरा भी काफी लंबा है। उनके खिलाफ कुल 5 एफआईआर दर्ज हैं। इनमें से 4 मामले मुर्शिदाबाद के बेरहमपुर पुलिस स्टेशन में और एक मामला मालदा के हरिशचंद्रपुर थाने में दर्ज है। इन सभी मामलों की सुनवाई वर्तमान में मुर्शिदाबाद और मालदा की विभिन्न अदालतों में चल रही है।

उनके खिलाफ लगे आरोपों की सूची में दंगा भड़काना, घातक हथियारों के साथ दंगा करना, अवैध सभा करना और सार्वजनिक मार्ग में बाधा डालना जैसे गंभीर बिंदु शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन पर लोक सेवक (Public Servant) को उसके कर्तव्य पालन से रोकने और विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने वाले बयान देने जैसे आपराधिक धमकी के मामले भी दर्ज हैं।

बहरामपुर की जंग और राजनीतिक भविष्य

अधीर रंजन चौधरी लंबे समय तक बहरामपुर से सांसद रहे हैं और लोकसभा में कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे थे। हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था। अब विधानसभा चुनाव में अपनी पारंपरिक सीट को बचाने और राज्य की राजनीति में कांग्रेस की प्रासंगिकता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी संपत्ति और इन लंबित मामलों का खुलासा मतदाताओं के रुख पर क्या प्रभाव डालता है। चुनावी मैदान में उतरे अन्य उम्मीदवारों के मुकाबले उनकी यह 'अमीर' छवि और 'विवादास्पद' कानूनी रिकॉर्ड आने वाले दिनों में बहस का मुद्दा बन सकते हैं।