Manipur Violence में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। राज्य के पहाड़ी इलाकों में शनिवार को भड़की हिंसा की घटनाएं कामजोंग और कांगपोकपी जिलों में सामने आईं। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सभी मृतकों की पहचान कर ली गई है।
Manipur Violence में किस समुदाय के कितने लोगों की मौत
अधिकारियों के अनुसार, मारे गए 9 लोगों में 6 नागा जनजाति से, 2 कुकी समुदाय से और एक नेपाली समुदाय से संबंधित था। हिंसा के दौरान कई घरों और दुकानों में आग लगाए जाने की भी खबर है।
पिछले कुछ महीनों से नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बना हुआ था, जो अब हिंसक घटनाओं के रूप में सामने आया है। ताजा घटना के बाद राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
नागा-कुकी संघर्ष का इतिहास
यह पहला मौका नहीं है, जब दोनों समुदायों के बीच तनाव ने गंभीर रूप लिया हो। साल 1992 में शुरू हुआ नागा-कुकी संघर्ष करीब 6 साल तक चला था और इस दौरान 1,000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी।
इसके अलावा साल 2023 में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच हुई हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इस पृष्ठभूमि में ताजा Manipur Violence को लेकर चिंता और बढ़ जाती है।
Manipur Violence पर मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कामजोंग और कांगपोकपी में हुई हिंसा और नागरिकों की मौत पर दुख जताया और घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को हालात काबू में करने, शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अलग-अलग समुदायों के नेताओं और सामाजिक संगठनों से संयम बरतने की अपील भी की। उनका कहना था कि तनाव कम करने के लिए सभी पक्षों को सहयोग करना चाहिए और शांति, बातचीत व आपसी सौहार्द को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में क्या हुआ
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और राज्य में हालात सामान्य बनाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इम्फाल, दीमापुर और गुवाहाटी के बीच बस सेवाएं दोबारा शुरू होने का जिक्र किया। साथ ही प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रकों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रखने के प्रयासों की भी जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने अलग-अलग समुदायों के बीच भरोसे की कमी दूर करने के लिए किए जा रहे कामों के बारे में भी प्रधानमंत्री को बताया। इसके साथ उन्होंने विकास से जुड़े कुछ प्रस्ताव रखे:
- राज्य के कुछ राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा देने की मांग
- इम्फाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) को AIIMS के स्तर पर विकसित करने का प्रस्ताव
- प्रधानमंत्री को मणिपुर आने का निमंत्रण
इन प्रस्तावों का उद्देश्य राज्य में सड़क संपर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार के प्रयासों को स्वीकार किया और कहा कि मणिपुर की स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लोगों की आकांक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनकी उचित मांगों पर विचार किया जाएगा।
आगे की चुनौती
सरकार के प्रयासों के बावजूद ताजा Manipur Violence ने दिखाया है कि समुदायों के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। फिलहाल प्रशासन के सामने हालात काबू में रखना और अलग-अलग समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना सबसे अहम काम है। हिंसा के कारणों या घटना की जांच को लेकर उपलब्ध सामग्री में कोई जानकारी नहीं है।