मुख्य बातें
- ईरान ने अमेरिका की 'समुद्री डकैती और गुंडागर्दी' के खिलाफ 'अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई' की चेतावनी दी है।
- तेहरान ने अमेरिका पर होर्मुज जलडमरूमध्य में 'गैरकानूनी' समुद्री नाकेबंदी का आरोप लगाया है।
- संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को 'कानूनी व्यापार में गैरकानूनी दबाव' और 'समुद्री डकैती' बताया।
तेहरान से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। ईरान के सरकारी प्रेस टीवी ने बुधवार को बताया कि अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ जारी 'समुद्री नाकेबंदी' और 'समुद्री डकैती व गुंडागर्दी' को जल्द ही 'व्यावहारिक और अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई' का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने एक प्रमुख सुरक्षा स्रोत के हवाले से बताया कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने स्पष्ट किया है कि 'धैर्य की भी एक सीमा होती है।' यदि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी 'गैरकानूनी' समुद्री नाकेबंदी जारी रखता है, तो उसे 'कड़ा जवाब' देना अनिवार्य होगा। सूत्र ने आगे कहा कि अगर अमेरिका अपनी 'हठ और भ्रम' पर अड़ा रहता है और ईरान की शर्तों को नहीं मानता, तो 'दुश्मन' को नौसैनिक नाकेबंदी के जवाब में एक अलग तरह की कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिसे उन्होंने 'समुद्री डकैती जैसा' करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान का कड़ा रुख
अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी जहाजों को जब्त करने की अमेरिका की कार्रवाई पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि यह “कानूनी व्यापार में गैरकानूनी दबाव और दखल” है। अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने बुधवार को यह जानकारी दी। इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को लिखे एक पत्र में जोर देकर कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों को पकड़ना 'समुद्री डकैती' के बराबर है।
अमेरिका ने स्वीकारी तेल की जब्ती
इस बीच, अमेरिका के जिला अटॉर्नी (वाशिंगटन डीसी) जीनीन पिरो ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दो जहाजों, 'एमटी मजेस्टिक' और 'एमटी टिफनी' को जब्त करने और उनमें मौजूद 3.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल को 'लेने' की बात स्वीकार की। यह स्वीकारोक्ति ईरान के आरोपों को और बल देती है।
नाकेबंदी और पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में यह नाकेबंदी उस समय लगाई जब 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत के बाद कोई समझौता नहीं हो सका। यह कदम पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में 8 अप्रैल को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच एक युद्धविराम लागू हुआ था, जो 40 दिनों की भीषण लड़ाई के बाद हुआ। यह लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान और उसके कई शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। मौजूदा चेतावनी उसी संघर्ष की एक नई कड़ी प्रतीत होती है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिससे यह भू-राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र बन जाता है। - ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव का मुख्य कारण क्या है?
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लगाई गई समुद्री नाकेबंदी और ईरानी जहाजों पर 'समुद्री डकैती' का आरोप है, जिसके जवाब में ईरान ने अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह हालिया संघर्ष और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पुराने विवादों की निरंतरता है।