भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर जारी विवाद का असर अब पाकिस्तान के कई हिस्सों में साफ दिखाई देने लगा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि देश की बड़ी आबादी पानी की कमी से जूझ रही है और इसका सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है।

सिंध और बलूचिस्तान में गहराया जल संकट

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की कई प्रमुख नहरों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है। इसकी वजह से किसानों के सामने फसलों की सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। कई इलाकों में खेत सूखने लगे हैं, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ सकता है।

भारत ने क्यों रोकी सिंधु जल संधि?

भारत ने वर्ष 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने का फैसला लिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच जल संसाधनों को लेकर तनाव और बढ़ गया।

भारत सरकार का रुख साफ रहा है कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। केंद्र सरकार की ओर से कई बार यह दोहराया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर भारत का सख्त रुख दोहराते हुए कहा कि देश अपने जल संसाधनों को आतंकवाद को समर्थन देने वालों तक नहीं पहुंचने देगा।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच नदियों के जल बंटवारे का आधार बना और कई दशकों तक दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण माध्यम रहा।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दों के कारण यह समझौता फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

पाकिस्तान में बढ़ रहा राजनीतिक विवाद

जल संकट के बीच पाकिस्तान में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हालात बिगाड़ने का आरोप लगा रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नेतृत्व वाली सिंध सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कराची समेत कई इलाकों में पानी की पुरानी समस्या का समाधान नहीं किया जा सका।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पानी की कमी आने वाले समय में पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।

अर्थव्यवस्था और कृषि पर पड़ सकता है असर

पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में जल संकट ने नई चिंता खड़ी कर दी है। कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है और पानी की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो खाद्यान्न उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मौसम और बारिश की स्थिति पाकिस्तान के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी।

भारत-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ी संवेदनशीलता

सिंधु जल संधि को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

फिलहाल, पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में पानी की कमी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कृषि व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है, जबकि विशेषज्ञ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।