Iran-US Conflict : पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संसाधनों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए हैं। दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी कहा है कि उसकी सेनाएं ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखे हुए हैं।
IRGC ने क्या दावा किया?
IRGC के आधिकारिक समाचार माध्यम सेपा न्यूज के अनुसार, ये कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ किए गए हमलों के जवाब में की गई।
IRGC का दावा है कि कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी हथियार भंडार को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया। संगठन ने यह भी कहा कि वहां अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों पर हमला हुआ, जिससे नुकसान और हताहत हुए।
इसके अलावा IRGC ने दावा किया कि—
- कुवैत के अल-अदिरी कैंप में अमेरिकी हथियार और उपकरण भंडार को निशाना बनाया गया।
- बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय के एक निगरानी टावर को नुकसान पहुंचाया गया।
- बहरीन में एक अमेरिकी कंपनी के डेटा सेंटर पर पहले किए गए हमले के बाद बची संरचना को भी नष्ट किया गया।
- जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।
- इराक के एरबिल स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान एक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और एक निगरानी गुब्बारे को नष्ट करने का दावा किया गया।
IRGC ने यह भी कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने दक्षिण-पूर्वी ईरान के कहनुज क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी क्रूज मिसाइल को रोक दिया।
अमेरिका ने क्या कहा?
वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि उसकी सेनाओं ने लगातार 13वीं रात भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया।
CENTCOM के अनुसार, इस अभियान में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, ड्रोन ठिकानों, संचार नेटवर्क, तटीय निगरानी सुविधाओं और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक और व्यापारिक जहाजों के लिए संभावित खतरों को कम करना है।
बढ़ता तनाव और क्षेत्रीय चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक समुद्री मार्गों को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हुई हैं। ऐसे हालात में किसी भी नए सैन्य घटनाक्रम का प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।