Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और तिब्बत में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के बाद अमेरिका ने नेपाल को हर संभव मदद देने की पेशकश की है। वहीं, भारत ने राहत सामग्री की खेप नेपाल भेजी है।
हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा से सड़कें, पुल, घर और दूसरी अहम संरचनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों और कई जगहों पर संपर्क मार्ग टूटने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
ट्रंप ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल में हुई तबाही पर चिंता जताई है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नेपाल के नेताओं से संपर्क किया है और नेपाल को जिस भी तरह की मदद की जरूरत होगी, वह देने के लिए तैयार है।
ट्रंप ने फ्लैश फ्लड से हुई तबाही को बेहद भयावह बताया। उन्होंने कहा कि पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने मजबूत इमारतों तक को भारी नुकसान पहुंचाया। अमेरिका की ओर से नेपाल के लिए आपदा राहत सहायता की भी घोषणा की गई है।
नेपाल-तिब्बत में करीब 1500 लोग लापता
नेपाल पुलिस के अनुसार नेपाल में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग अभी लापता हैं। तिब्बत में भी लोगों के लापता होने की खबर है। दोनों क्षेत्रों के आंकड़ों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 तक पहुंच गई है।
लापता लोगों में विदेशी नागरिकों की संख्या भी काफी है। कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य पर्यटन गतिविधियों के लिए इस क्षेत्र में मौजूद थे। भारत समेत कई देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
ग्लेशियर टूटने से आई तबाही?
शुरुआती जानकारी में इस आपदा को ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से जुड़ी घटना बताया गया है। वैज्ञानिक और भूगर्भीय आकलन संकेत देते हैं कि ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने और उसके बाद मलबे के तेज बहाव ने नदी तंत्र में अचानक भारी उफान पैदा किया।
इस तेज बहाव ने नेपाल के रासुवा समेत कई इलाकों में घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया। कुछ इलाकों में मलबे के कारण नदियों का रास्ता भी प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों ने आगे भी भूस्खलन और बाढ़ के खतरे को लेकर चेतावनी दी है।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत सामग्री
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच भारत ने भी सहायता बढ़ा दी है। भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए नेपाल को राहत सामग्री भेजी गई है। इसमें दवाइयां, खाद्य सामग्री और दूसरी जरूरी चीजें शामिल हैं।
भारत की ओर से पहले भी मानवीय सहायता भेजी गई थी। ताजा खेप के साथ नेपाल में राहत अभियान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। नेपाल ने भारत की सहायता के लिए आभार जताया है।
राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना और पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है और प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
हालांकि, कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। अधिकारियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों को अस्पताल पहुंचाने और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने की है।
स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कुछ इलाकों में नए सिरे से बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में आने वाले घंटों में राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
भारत के लिए भी क्यों अहम है नेपाल की यह आपदा?
नेपाल की इस आपदा का असर सीमा से लगे भारतीय इलाकों पर भी पड़ सकता है। नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण भारत के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल नेपाल में सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाना है। अमेरिका, भारत और अन्य देशों से मिल रही सहायता से रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।