नई दिल्ली: भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI ने एक दशक का सफर पूरा कर लिया है। 25 अगस्त 2016 को शुरू हुआ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस आज रोजमर्रा के छोटे भुगतानों से लेकर बड़े ट्रांसफर तक का अहम माध्यम बन चुका है। शुरुआत में जहां UPI पर ट्रांजेक्शन की संख्या बेहद कम थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 24,162 करोड़ से आगे निकल गया।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, UPI के जरिए होने वाले लेन-देन में इस दौरान करीब 13,000 गुना की बढ़ोतरी हुई। यही तेज विस्तार भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल की सबसे बड़ी कहानी है।
2016 में हुई शुरुआत, पहले महीने सिर्फ 90 हजार ट्रांजेक्शन
UPI की शुरुआत नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की निगरानी में की थी। अगस्त 2016 में लॉन्च के पहले महीने में UPI पर करीब 90 हजार ट्रांजेक्शन हुए थे।
वित्त वर्ष 2016-17 में पूरे साल UPI से करीब 1.78 करोड़ लेन-देन हुए। इनकी कुल वैल्यू करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये थी।
इसके बाद जैसे-जैसे लोगों और कारोबारियों ने डिजिटल भुगतान को अपनाया, UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता गया।
एक दशक में ट्रांजेक्शन 13 हजार गुना बढ़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में UPI ट्रांजेक्शन की संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गई। यानी 2016-17 के मुकाबले लेन-देन की संख्या में करीब 13,000 गुना उछाल आया।
लेन-देन की कुल रकम में भी बड़ा बदलाव आया। 2016-17 में जहां UPI के जरिए करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह करीब 4,000 गुना की बढ़ोतरी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में UPI ट्रांजेक्शन की संख्या में सालाना औसतन करीब 188 प्रतिशत और वैल्यू में करीब 155 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
2026 में रोज करीब 66 करोड़ UPI ट्रांजेक्शन
UPI का इस्तेमाल अब किस स्तर तक पहुंच चुका है, इसका अंदाजा रोज होने वाले ट्रांजेक्शन से लगाया जा सकता है। 2026 में औसतन करीब 66 करोड़ लेन-देन रोज UPI के जरिए हुए।
जुलाई 2026 में UPI ने एक और रिकॉर्ड बनाया। इस महीने करीब 2,366 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 29.88 लाख करोड़ रुपये रही।
इससे पहले मई 2026 में पहली बार किसी महीने में UPI ट्रांजेक्शन की संख्या 2,300 करोड़ के पार पहुंची थी और यह करीब 2,320 करोड़ रही।
21 बैंकों से शुरू हुआ सफर, अब 741 बैंक जुड़े
UPI के विस्तार का असर इससे जुड़े बैंकों की संख्या में भी दिखाई देता है। अप्रैल 2016 में जब सिस्टम की शुरुआत हुई, तब 21 बैंक इससे जुड़े थे।
वित्त वर्ष 2016-17 में यह संख्या 44 थी। वित्त वर्ष 2025-26 तक UPI से जुड़े बैंकों की संख्या बढ़कर 703 हो गई। जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा 741 तक पहुंच गया।
इस नेटवर्क में सरकारी और निजी बैंकों के अलावा स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक भी शामिल हैं।
दुकानदार से लेकर परिवार तक, हर जगह UPI
UPI की सबसे बड़ी ताकत इसका रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल है। चाय-कॉफी या किराने के छोटे भुगतान से लेकर बड़े बैंक ट्रांसफर तक, डिजिटल पेमेंट का यह सिस्टम आम लोगों के व्यवहार का हिस्सा बन गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल ट्रांजेक्शन की संख्या में करीब 63 प्रतिशत हिस्सा दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान का है। वहीं ट्रांसफर हुई कुल रकम में करीब 71 प्रतिशत हिस्सा व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेन-देन का है।
2026 में दुकानदारों को किए जाने वाले करीब 86 प्रतिशत भुगतान 500 रुपये से कम के थे। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले करीब 59 प्रतिशत ट्रांजेक्शन 500 रुपये से कम के रहे।
UPI की ग्लोबल पहुंच भी बढ़ी
भारत में सफलता के बाद UPI का विस्तार दूसरे देशों तक भी हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक UPI अब संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव समेत 11 देशों में मौजूद है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी UPI को रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम के तौर पर बड़ी पहचान मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 में ग्लोबल रियल-टाइम पेमेंट वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही।
UPI की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं
UPI के दस साल के सफर को सिर्फ बढ़ते ट्रांजेक्शन के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। इसने भारत में डिजिटल भुगतान को आसान और रोजमर्रा की जरूरत से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।
एक दशक पहले जहां डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल सीमित था, वहीं आज मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में भुगतान करना आम बात है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार और व्यक्तिगत ट्रांसफर तक UPI की पहुंच बढ़ी है।
आगे UPI के सामने चुनौती सिर्फ ट्रांजेक्शन बढ़ाने की नहीं होगी, बल्कि बढ़ते डिजिटल नेटवर्क के साथ साइबर सुरक्षा, भरोसा और अंतरराष्ट्रीय विस्तार को मजबूत बनाए रखने की भी होगी।