संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद यानी UNHRC में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर जम्मू-कश्मीर और मानवाधिकारों को लेकर तीखी बयानबाजी हुई। भारत की ओर से इंडियन डिप्लोमैट क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूसरे देशों की जमीन पर कब्जे की कोशिश और आतंकवाद को बढ़ावा देने से पाकिस्तान की आर्थिक समस्याएं दूर नहीं होंगी।
त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों के मामलों में दखल देने के बजाय अपने नागरिकों के विकास और उनकी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि UN में इस तरह की बयानबाजी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं होने वाला।
PoK में नागरिकों की स्थिति का मुद्दा उठाया
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में आम नागरिकों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार वहां लोगों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम रही है।
भारत के मुताबिक, इस साल जून में PoK में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में आम लोगों की मौत हुई। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार पर खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दवाओं जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई रोकने के आरोप लगाए थे।
त्यागी ने कहा कि परिषद को पिछले शुक्रवार को भी PoK में जून से अब तक आम नागरिकों की मौत और इस्लामाबाद तथा रावलपिंडी में छात्रों की गिरफ्तारी के बारे में बताया गया था।
'अगर जांच के सभी मानदंड हैं तो पाकिस्तान पूरा करता है'
भारत ने कहा कि जब इन मुद्दों को परिषद के सामने रखा गया तो पाकिस्तान ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर का सहारा लिया।
त्यागी ने कहा कि अगर इस कमरे में मौजूद कोई प्रतिनिधिमंडल UNHRC की जांच के सभी मानदंडों को पूरा करता है, तो वह पाकिस्तान है।
जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत का रुख दोहराया
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने अपना रुख दोहराते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था और रहेगा।
त्यागी ने पाकिस्तान से उसके कब्जे वाली जमीन खाली करने की मांग की। उन्होंने कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के पलायन का मुद्दा भी उठाया।
भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार से कश्मीर में आतंकियों को भेजने और उन्हें पाकिस्तान में ट्रेनिंग देने का आरोप भी लगाया। त्यागी ने कहा कि जिन आतंकियों ने कश्मीर में अलग-अलग धर्मों के लोगों को निशाना बनाया, उनमें बड़ी संख्या मुसलमानों की भी थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे आतंकियों को कथित तौर पर समर्थन देने वाला देश अब इसी परिषद से जांच की मांग कर रहा है। भारत ने इसे परिषद के सामने एक विरोधाभासी स्थिति के रूप में पेश किया।
पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल
भारत ने पाकिस्तान में हिंदू, सिख, ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा भी UNHRC में उठाया।
त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्मांतरण और शादी के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों की स्थिति का भी जिक्र किया।
भारत के मुताबिक इन समुदायों के लोगों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है और उनके धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया जाता है।
त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय अपने कब्जे वाले इलाकों और वहां रहने वाले लोगों की स्थिति पर जवाब देना चाहिए।
पाकिस्तान ने भारत के आरोपों को खारिज किया
भारत के बयान के बाद पाकिस्तान ने भी राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीब अहमद ने भारत के आरोपों को खारिज किया और जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के पुराने आरोप दोहराए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कुर्बानियां दी हैं।