PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने एक बड़ा लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का कम से कम एक बैंक दुनिया के Top-5 बैंकों में अपनी जगह बनाए। इस लक्ष्य को ‘विकसित भारत 2047’ की व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री के इस लक्ष्य के बाद बैंकिंग सेक्टर में सुधार और भविष्य की जरूरतों को लेकर सरकार की तैयारी भी सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने की बात कही है।
PM Modi ने क्या कहा?
लाल किले से अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़े लक्ष्य की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत को अब वैश्विक स्तर पर अपनी संस्थाओं की ताकत बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
प्रधानमंत्री ने खास तौर पर यह लक्ष्य रखा कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के Top-5 बैंकों में शामिल हो।
उन्होंने इसी तरह फार्मा सेक्टर में भी भारतीय कंपनी को दुनिया की Top-5 कंपनियों में पहुंचाने का लक्ष्य रखने की बात कही।
प्रधानमंत्री का यह आह्वान बैंकिंग सेक्टर के लिए सिर्फ आकार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध भारतीय बैंकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था की वित्तीय जरूरतों से भी है।
निर्मला सीतारमण बनाएंगी हाई लेवल कमेटी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर को आने वाले वर्षों की आर्थिक जरूरतों के लिए तैयार करना है।
सरकार की ओर से बैंकिंग क्षेत्र में पहले भी कई बड़े संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के जरिए बड़े बैंक बनाने की प्रक्रिया इसी दिशा में एक अहम कदम रही है।
वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल बदलाव, बेहतर ग्राहक सेवाएं, मजबूत बैलेंस शीट और जोखिम प्रबंधन पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति में भी पिछले वर्षों में सुधार हुआ है।
बड़े भारतीय बैंक बनाने पर क्यों है जोर?
भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के साथ ऐसे बैंकों की जरूरत भी बढ़ रही है जो बड़े स्तर पर कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकें।
सरकार की बैंकिंग नीति में पिछले कुछ वर्षों से छोटे-छोटे सरकारी बैंकों को मिलाकर अपेक्षाकृत मजबूत संस्थान तैयार करने पर जोर रहा है। इससे बैंकों की पूंजी क्षमता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की गई है।
अब प्रधानमंत्री के Top-5 बैंक के लक्ष्य के बाद चर्चा इस बात पर है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर किस तरह वैश्विक स्तर के बड़े संस्थानों के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
‘विकसित भारत 2047’ से जुड़ा है लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने बैंकिंग सेक्टर के लक्ष्य को व्यापक रूप से विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ा है। भारत की अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ वित्तीय संस्थानों को भी उसी स्तर पर मजबूत बनाने की जरूरत बताई जा रही है।
सरकार पहले ही बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल पेमेंट, वित्तीय समावेशन, ग्राहक सेवाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार से जुड़े कई कदम उठा चुकी है। वित्त मंत्रालय के अनुसार बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एनपीए प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सुधार जारी हैं।
अब आगे क्या होगा?
हाई लेवल कमेटी की सिफारिशें इस दिशा में आगे की नीति तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। सरकार का फोकस ऐसे बैंकिंग सिस्टम पर है जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा कर सके।
हालांकि, किसी भारतीय बैंक का दुनिया के Top-5 में पहुंचना लंबी प्रक्रिया होगी। इसके लिए बैंक के आकार के साथ पूंजी, कारोबार, तकनीक, वैश्विक उपस्थिति, जोखिम प्रबंधन और लगातार मजबूत वित्तीय प्रदर्शन जैसे कई मानकों पर काम करना होगा।
फिलहाल प्रधानमंत्री के ऐलान और वित्त मंत्रालय की प्रस्तावित समीक्षा ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर को वैश्विक स्तर पर ले जाने की बहस को नई दिशा दे दी है।