Hajipur Boat Accident: हाजीपुर में 13 बच्चों की मौत, नाव में मिला छेद; दिवाली से पहले कई परिवारों में मातम
Hajipur Boat Accident | बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित राघोपुर इलाके में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की शाम रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुआ। नाव पर सवार लोग दूसरे गांव में श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। हादसे के बाद जब नाव को नदी से बाहर निकाला गया, तो उसमें एक बड़ा छेद मिला। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नाव की जर्जर हालत और क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की आशंका हादसे की वजह हो सकती है। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है |
हाजीपुर नाव हादसा कैसे हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 8:30 बजे रामपुर श्यामचंद गांव के पास गंगा नदी में नाव पलट गई। नाव में 20 से अधिक लोग सवार बताए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल थे, जो पड़ोसी गांव में श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे।
नदी के बीच अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया और उसमें सवार लोग पानी में गिर गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। इसके बाद नदी में लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया गया।
प्रशासन के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की उम्र कम थी। एक साथ इतने बच्चों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
Hajipur Boat Accident - जर्जर हालत पर सवाल
हादसे के बाद बचाव दल ने पलटी हुई नाव को नदी से बाहर निकाला। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, नाव के एक हिस्से में बड़ा छेद मिला। इससे नाव की सुरक्षा और उसकी देखरेख को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नाव की हालत काफी खराब थी। ग्रामीणों के अनुसार, यह नाव वर्षों पहले सरकारी तौर पर उपलब्ध कराई गई थी और इसका इस्तेमाल नदी पार करने के लिए किया जाता था।
प्रारंभिक आशंका है कि नाव में छेद होने से पानी भरने लगा होगा। नाव पर अधिक लोगों के सवार होने के कारण उसका संतुलन बिगड़ सकता था, जिसके बाद वह पलट गई। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हादसे से बचाए गए बच्चों ने क्या बताया?
नाव हादसे में सुरक्षित बचाए गए बच्चों ने घटना के भयावह क्षणों के बारे में जानकारी दी। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बच्चों ने बताया कि नाव में छेद से पानी अंदर आने लगा था। देखते ही देखते पानी तेजी से भरने लगा और नाव पलट गई।
एक बच्चे ने बताया कि उसके दादा ने उसे बचाया, जबकि दूसरे बच्चे ने कहा कि उसने एक व्यक्ति के पैर पकड़ लिए थे। उस व्यक्ति ने उसे अपने कंधे पर उठाया और बाद में पेड़ की एक मोटी टहनी की मदद से उसे किनारे तक पहुंचने में सहायता मिली।
इन बच्चों के बयान हादसे की गंभीरता को सामने लाते हैं। साथ ही, नाव की स्थिति और उसमें सवार लोगों की संख्या की जांच की जरूरत भी रेखांकित करते हैं।
एक ही परिवार के कई बच्चों की मौत से गांव में मातम
इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में एक ही परिवार के कई बच्चे शामिल थे। जिन घरों में त्योहारों की तैयारियां होनी थीं, वहां अब शोक का माहौल है।
मृत बच्चों के शव गांव पहुंचने के बाद परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी और प्रशासन से हादसे की जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इस घटना ने नदी किनारे बसे गांवों में सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था और पुरानी नावों के नियमित निरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
बिहार सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹4 लाख देने का ऐलान किया
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने तथा घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता घोषित की गई।
इस सहायता का उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत देना है। हालांकि, जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए यह क्षति अपूरणीय है।
तेजस्वी यादव और चिराग पासवान ने जताया दुख
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने हादसे पर दुख जताया और राहत-बचाव तथा उपचार कार्यों में तेजी लाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्थानीय लोगों और अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी लेने की बात कही।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी घटना पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने पर जोर दिया।
अब हादसे की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
हाजीपुर के राघोपुर में हुआ यह हादसा नदी के रास्ते यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। नाव की जर्जर हालत, उसमें मिले छेद और यात्रियों की संख्या की जांच महत्वपूर्ण होगी।
प्रशासन के लिए जरूरी है कि हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नावों की नियमित जांच, सुरक्षित क्षमता का पालन तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
यह भी पढ़ें - Delhi Electricity Subsidy: मुफ्त बिजली के लिए आधार अनिवार्य, नियम